एमपी में 5 अधिकारियों पर एफआईआर, ईओडब्लू की कड़ी कार्रवाई से मची खलबली
EOW- नोडल अधिकारियों ने प्राइवेट स्कूलों के संचालकों के साथ मिलकर सरकार को लगाया चूना
भोपाल (आरएनआई) अफसरों पर केस दर्ज गबन मामले में गिरी गाज ईओडब्लू ने कई अधिकारियों पर की एफआईआर EOW- मध्यप्रदेश में शिक्षा विभाग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। स्कूलों में कमजोर वर्ग के बच्चों की शिक्षा राशि में गबन किया गया है। मामले में शिक्षा विभाग के कई अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध मिली। इस पर जबलपुर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने गबन करने वाले 5 अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते एफआईआर दर्ज की है। स्कूल संचालकों पर भी गबन मामले में केस दर्ज किया गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अधिकारियों के अनुसार आरोपियों ने 628 छात्रों के नाम पर ₹26.50 लाख रुपए का हेरफेर किया।
ईओडब्ल्यू ने विजयकांति पटेल की शिकायत पर ये कार्रवाई की। शिकायतकर्ता ने बताया कि शिक्षा विभाग के नोडल अधिकारियों ने प्राइवेट स्कूलों के साथ मिलकर कमजोर वर्ग के स्टूडेंट की फीस की राशि हड़प ली। ईओडब्ल्यू की जांच में बड़ा घोटाला उजागर हुआ। जांच में सामने आया कि एक ही छात्र का कई बार एडमिशन दिखाकर लाखों रुपए की हेराफेरी की गई।
प्राइवेट स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को निशुल्क प्रवेश दिए जाने का प्रावधान है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 25 प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिया जाता है जिसकी फीस सरकार भरती है।
628 फर्जी एडमिशन दर्शाकर 26 लाख 50 हजार रुपए की फीस हड़प ली
शिकायत की जांच में पाया गया कि स्कूल संचालकों ने एक ही छात्र को दो से तीन बार एडमिशन दर्शाकर जिला शिक्षा केंद्र, जबलपुर से इस योजना में शासन द्वारा दी गई फीस राशि का भुगतान करवा लिया। जबलपुर के स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी, आदर्श ज्ञान सागर, गुरु पब्लिक स्कूल, उस्मानिया मिडिल स्कूल और सेंट अब्राहम स्कूल के संचालकों ने 628 छात्रों का फर्जी एडमिशन दर्शाकर 26 लाख 50 हजार रुपए की फीस हड़प ली।
शिक्षा विभाग के तत्कालीन नोडल अधिकारियों ने यह कारस्तानी की। सन 2011 से 2016 के दौरान पदस्थ नोडल अधिकारियों ने स्कूल संचालकों के साथ षड्यंत्र करते हुए पद का दुरुपयोग किया गया।
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