ऊर्जा संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला: पेट्रोल पर एक्साइज 3 रुपये, डीजल पर शून्य; तेल कंपनियों को राहत
नई दिल्ली (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ती वैश्विक तेल कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए पेट्रोल-डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) में भारी कटौती की है। वित्त मंत्रालय की 26 मार्च की अधिसूचना के अनुसार, प्रति लीटर 10 रुपये की कमी की गई है, जिसके बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 13 रुपये से घटकर 3 रुपये रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण देश की तेल विपणन कंपनियों पर भारी दबाव था। Indian Oil Corporation (आईओसी), Bharat Petroleum (बीपीसीएल) और Hindustan Petroleum (एचपीसीएल) जैसी कंपनियां लगातार नुकसान झेल रही थीं, क्योंकि घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर रखी गई थीं।
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 100-105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 11 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 14 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो सकता है। हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कीमतें 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं, जो अब घटकर करीब 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास हैं।
राजधानी New Delhi में फिलहाल पेट्रोल 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 87.67 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर हैं। सरकार के इस कदम से तेल कंपनियों को राहत मिलने की उम्मीद है, हालांकि उपभोक्ताओं को तत्काल कीमतों में बड़ी कमी का फायदा मिलेगा या नहीं, यह कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति पर निर्भर करेगा।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है और इसका बड़ा हिस्सा Strait of Hormuz के रास्ते आता है। हालिया संघर्ष के चलते इस मार्ग में बाधा आने से वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर भी पड़ा है।
इस बीच Nayara Energy ने बढ़ती लागत का कुछ बोझ उपभोक्ताओं पर डालते हुए अपने पंपों पर पेट्रोल की कीमत 100.71 रुपये और डीजल 91.31 रुपये प्रति लीटर कर दी है। वहीं Jio-bp (रिलायंस और बीपी की संयुक्त कंपनी) ने अभी तक कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है, जबकि सरकारी कंपनियां भी फिलहाल दरें स्थिर बनाए हुए हैं।
दरअसल, उत्पाद शुल्क केंद्र सरकार द्वारा लगाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण टैक्स होता है, जिससे सरकार को राजस्व प्राप्त होता है। इसी राजस्व का उपयोग देश के बुनियादी ढांचे, रक्षा और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाता है।
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