यूपी: एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बसों में क्यों लग रही आग, सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल; 12 दिन में दूसरी घटना
ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर बुधवार को आगरा की ओर जा रही एक स्लीपर बस में अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। आग तेजी से फैलने के बाद यात्रियों ने बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
यह घटना ऐसे समय हुई है जब पिछले 12 दिनों में स्लीपर बस में आग लगने की यह दूसरी बड़ी घटना है। इससे बसों की सुरक्षा व्यवस्था, फिटनेस प्रमाणपत्र और नियमित जांच को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए बसों में आपातकालीन निकास, अग्निशमन उपकरण और अन्य जरूरी सुरक्षा इंतजामों की प्रभावी स्थिति में होना बेहद जरूरी है।
इससे पहले 24 सितंबर को भी स्लीपर बस में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें नौ यात्रियों की मौत हो गई थी। उस हादसे के बाद परिवहन विभाग और प्रशासन की ओर से स्लीपर बसों की फिटनेस तथा सुरक्षा मानकों की जांच को लेकर सवाल उठे थे। इसके बावजूद कम समय के भीतर एक और बस में आग लगने की घटना ने व्यवस्थाओं पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्लीपर बसों में आग लगने की स्थिति में यात्रियों के पास बाहर निकलने के लिए सीमित समय होता है। ऐसे में बस के इलेक्ट्रिकल सिस्टम, वायरिंग, इंजन और अन्य तकनीकी हिस्सों की नियमित जांच के साथ अग्निशमन उपकरणों और आपातकालीन निकास की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद अब परिवहन विभाग की जांच व्यवस्था और बस संचालकों की जिम्मेदारी पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है। सवाल यह है कि फिटनेस जांच के दौरान सुरक्षा मानकों की कितनी गंभीरता से पड़ताल की जा रही है और नियमों का उल्लंघन मिलने पर संचालकों के खिलाफ कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।
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