कानपुर आरटीओ में छापा: दीवार फांदकर भागे दलाल, अवैध दुकानों के शटर गिरे; बाबू की जेब से मिला एक लाख रुपये कैश
कानपुर आरटीओ कार्यालय में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई के दौरान हड़कंप मच गया। करीब 50 पुलिसकर्मियों की टीम बुलेटप्रूफ जैकेट पहनकर आरटीओ परिसर में पहुंची और दोनों गेटों को सील कर दिया गया। कार्रवाई के दौरान कई दलालों में अफरातफरी मच गई और कुछ के दीवार फांदकर भागने की बात सामने आई। इस दौरान अवैध रूप से संचालित दुकानों के शटर भी गिरा दिए गए।
छापेमारी के दौरान करीब 22 दलालों के खिलाफ कार्रवाई की गई। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई, जब एक बाबू की जेब से करीब एक लाख रुपये का बेहिसाब कैश मिलने की बात सामने आई। बरामद रकम को लेकर जांच की जा रही है कि यह पैसा कहां से आया और किस काम के लिए रखा गया था।
आरटीओ कार्यालय में दलालों के सक्रिय होने की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। आरोप है कि लाइसेंस, वाहन फिटनेस, आरसी और अन्य कामों के लिए आम लोगों को दलालों के माध्यम से काम कराने के लिए मजबूर किया जाता था। कई लोगों का आरोप है कि सीधे काउंटर पर जाने पर कभी सर्वर खराब होने, कभी अधिकारी के मौजूद नहीं होने या दस्तावेजों में कमी होने जैसी वजह बताई जाती थी, जबकि दलाल के माध्यम से काम कराने पर प्रक्रिया जल्दी पूरी हो जाती थी।
छापेमारी के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की संभावना है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने का प्रयास किया जाएगा कि कार्यालय में अवैध वसूली का नेटवर्क कैसे काम कर रहा था और इसमें किन लोगों की भूमिका थी।
ऑनलाइन भी हो सकते हैं कई काम
वाहन और ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़ी कई सेवाएं परिवहन विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध हैं। इससे लोगों को अनावश्यक रूप से दलालों के चक्कर लगाने से बचने में मदद मिल सकती है।
इस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकारी कार्यालयों में आम लोगों को बिना किसी बिचौलिए के पारदर्शी और समयबद्ध सेवा कैसे मिले। भ्रष्टाचार पर कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब जांच के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था भी सुनिश्चित हो जिसमें लोगों को अपने वैध काम के लिए दलालों पर निर्भर न रहना पड़े।
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