संघप्रिय के तबादले पर भावुक हुआ ग्वालियर, जन-केंद्रित प्रशासन और कार्यसंस्कृति की छोड़ी मिसाल
विष्णु अग्रवाल
ग्वालियर (आरएनआई) ग्वालियर नगर निगम आयुक्त श्री संघप्रिय का स्थानांतरण केवल एक प्रशासनिक दायित्व का परिवर्तन नहीं है, बल्कि ग्वालियर में एक ऐसी कार्यसंस्कृति की स्मृति छोड़ रहा है, जिसमें ईमानदार प्रयास, निरंतर मेहनत, उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग और नागरिकों को केंद्र में रखकर सुशासन को प्राथमिकता दी गई।
श्री संघप्रिय के कार्यकाल को निकट से देखने और उनके साथ हुए संवादों से यह स्पष्ट अनुभव हुआ कि वे प्रशासन को केवल फाइलों और औपचारिकताओं तक सीमित रखने के बजाय मैदानी स्तर पर परिणाम देने वाला माध्यम मानते रहे। शहर की समस्याओं को समझना, उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित ढंग से लगाना और अधिकारियों-कर्मचारियों से समयबद्ध एवं जिम्मेदार कार्यसंस्कृति की अपेक्षा रखना उनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही।
विशेष रूप से स्वच्छता, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छ विद्यालय, जन-जागरूकता, विकास कार्यों की गुणवत्ता तथा नागरिक सुविधाओं जैसे विषयों पर उनका जोर दिखाई दिया। उनका दृष्टिकोण यह रहा कि किसी भी योजना की सफलता केवल उसके स्वीकृत होने में नहीं, बल्कि उसके जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिकों तक वास्तविक लाभ पहुंचने में है।
उनकी कार्यशैली में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि वे उपलब्ध सीमित संसाधनों को लेकर शिकायत करने के बजाय उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम और विवेकपूर्ण उपयोग करने की संस्कृति को प्रोत्साहित करते दिखाई दिए। यही सोच किसी भी नगरीय प्रशासन को अधिक प्रभावी, उत्तरदायी और परिणामोन्मुख बनाती है।
श्री संघप्रिय का कार्यकाल मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की व्यापक जन-केंद्रित सुशासन की सोच से भी सामंजस्य स्थापित करता दिखाई दिया—जिसमें प्रशासन का मूल उद्देश्य जनता की सुविधा, शहरों का व्यवस्थित विकास, उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग और शासन को अधिक संवेदनशील एवं उत्तरदायी बनाना है।
ग्वालियर जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर में नगर निगम आयुक्त की भूमिका अत्यंत चुनौतीपूर्ण होती है। नागरिक अपेक्षाओं, सीमित संसाधनों, बढ़ते शहरीकरण और विकास की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाना आसान कार्य नहीं है। ऐसे वातावरण में श्री संघप्रिय ने काम करने, समस्याओं को देखने और समाधान की दिशा में आगे बढ़ने की संस्कृति को महत्व दिया।
उनकी एक और उल्लेखनीय विशेषता रही—वरिष्ठ नागरिकों और आम नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता। प्रशासनिक पद की गरिमा बनाए रखते हुए नागरिकों की बात सुनना और उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना उनके व्यक्तित्व का महत्वपूर्ण पक्ष रहा।
ग्वालियर उनके कार्यकाल को एक ऐसे अधिकारी के रूप में याद रखेगा, जिन्होंने अपने दायित्व को केवल नौकरी या पद के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक सेवा की जिम्मेदारी के रूप में निभाने का प्रयास किया।
स्थानांतरण प्रशासनिक व्यवस्था का स्वाभाविक हिस्सा है। श्री संघप्रिय अब जहां भी अपनी सेवाएं देंगे, वहां ग्वालियर में विकसित की गई उनकी मेहनत, ईमानदारी, संवेदनशीलता, संसाधनों के सदुपयोग और जन-केंद्रित सुशासन की कार्यसंस्कृति निश्चित रूप से उनके साथ जाएगी।
ग्वालियर उन्हें विदाई नहीं, बल्कि उनके योगदान के प्रति सम्मान और भविष्य की जिम्मेदारियों के लिए शुभकामनाओं के साथ याद करेगा
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