दिशा सालियान मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट ने जांच की विसंगतियों पर उठाए सवाल, सीबीआई जांच का दिया आदेश
मुंबई। दिशा सालियान की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस की अब तक की जांच में कई गंभीर विसंगतियों का उल्लेख करते हुए मामले में नए सिरे से जांच की जरूरत बताई है। 2 सितंबर 2026 को दिए आदेश में अदालत ने कहा कि करीब छह साल तक चली धारा 174 के तहत की गई जांच पर्याप्त नहीं थी और मामले में संज्ञेय अपराध की जांच के लिए एफआईआर दर्ज करना जरूरी है।
अदालत ने जांच के दौरान सामने आए कई पहलुओं का उल्लेख किया। इनमें घटनास्थल का पंचनामा देर से तैयार होना, सीसीटीवी फुटेज में रात करीब एक बजे से दो बजे के बीच पुलिस की मौजूदगी का रिकॉर्ड होना, लेकिन संबंधित पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी और कार्रवाई का स्पष्ट उल्लेख न मिलना शामिल है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि जिस स्थान पर दिशा के गिरने की बात कही गई थी, वहां से खून के नमूने बरामद नहीं किए गए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और शरीर पर कई चोटों का उल्लेख था। अदालत ने विशेष रूप से कहा कि यदि 12वीं मंजिल से चेहरे के बल गिरने की बात मानी जाए, तो चेहरे की किसी भी हड्डी में फ्रैक्चर नहीं होने का पहलू विशेषज्ञ राय के अधीन जांच योग्य है। अदालत ने इस बिंदु को भी उन परिस्थितियों में शामिल किया, जिनके कारण विस्तृत जांच आवश्यक मानी गई।
इसके अलावा फॉरेंसिक जांच से जुड़े रिकॉर्ड में कपड़ों और अन्य वस्तुओं पर अपेक्षा से कम खून मिलने का मुद्दा भी सामने आया। अदालत ने यह भी नोट किया कि दिशा का मोबाइल फोन और लैपटॉप घटनास्थल के पंचनामा के दौरान जब्त नहीं किए गए और बाद में उन्हें जब्त कर जांच के लिए भेजा गया।
इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले में एफआईआर दर्ज कर सभी पहलुओं की जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि उसके आदेश में दर्ज टिप्पणियों को किसी व्यक्ति के खिलाफ निष्कर्ष नहीं माना जाएगा और जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से जांच करनी होगी।
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