चीन-नेपाल सीमा पर जलप्रलय: बाढ़ और भूस्खलन से 97 लोगों की मौत, 550 से ज्यादा लापता
नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है। नेपाल के उत्तरी हिस्से में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ और उसके बाद हुए मलबे के बहाव से अब तक 97 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 550 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। आपदा से बड़ी संख्या में सड़कें, पुल, जलविद्युत परियोजनाएं और अन्य बुनियादी ढांचे भी प्रभावित हुए हैं।
नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल के प्रवक्ता शैलेंद्र थापा के मुताबिक, बचाव दल अब तक 97 शव बरामद कर चुके हैं, जबकि 54 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्र में बड़ी संख्या में पर्यटक और यात्री भी मौजूद थे, जिनमें से 384 लोगों के लापता होने की सूचना नेपाल पर्यटन बोर्ड को मिली है। इन लोगों की स्थिति की पुष्टि के लिए संबंधित एजेंसियां काम कर रही हैं।
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि रासुवा जिले में बाढ़ की चपेट में आने से सुरक्षाबलों के ठिकाने भी बह गए। उन्होंने बताया कि 29 पुलिसकर्मी और 44 सैनिक लापता हैं। बाढ़ ने सीमावर्ती इलाकों में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है और कई स्थानों पर संपर्क व्यवस्था बाधित हो गई है।
सरकारी अनुमान के अनुसार, आपदा में कम से कम 19 पुल बह गए हैं, जबकि करीब 40 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। 13 जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा करीब 200 ट्रक बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। कई सरकारी कार्यालयों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल सरकार के अनुसार, सीमा क्षेत्र में आए भूकंप के बाद हिमस्खलन हुआ, जिसके बाद तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियल झीलों के टूटने से अचानक पानी का भारी बहाव पैदा होने की आशंका जताई गई है। इसके बाद भोटेकोशी नदी और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
उधर, चीन के दक्षिणी तिब्बत क्षेत्र में भी इस प्राकृतिक आपदा से नुकसान की खबर है। चीन के अनुसार, वहां तीन लोगों की मौत हुई है और 265 लोग लापता बताए गए हैं। चीन इस क्षेत्र को शिजांग स्वायत्त क्षेत्र के रूप में संदर्भित करता है।
नेपाल-चीन सीमा के इस दुर्गम हिमालयी क्षेत्र में राहत एवं बचाव अभियान चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों के लापता होने और कई प्रमुख मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के कारण प्रभावित लोगों तक पहुंचने में बचाव दलों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश, घायलों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाकों में जरूरी राहत पहुंचाने की है।
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