पीलीभीत की मतदाता सूची में गड़बड़ी की पुष्टि, दो कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मामले की जांच के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मतदाताओं के पहचान पत्र संख्या (EPIC) को ऑनलाइन खोजने पर दूसरे व्यक्ति का विवरण सामने आने की गड़बड़ी भी जांच में पाई गई है।
यह मामला समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की शिकायतों के बाद सामने आया। कांग्रेस ने बुधवार को लखनऊ में प्रेसवार्ता कर आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव किए गए। पार्टी का दावा है कि 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, जबकि उनके ईपीआईसी नंबर और क्रम संख्या वही रहे। इसके अलावा 884 मतदाताओं के नाम हटाने और 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़ने का आरोप लगाया गया, जो संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। कांग्रेस ने इन मामलों को मिलाकर 16,554 मतदाताओं से जुड़ी कथित विसंगतियां बताई हैं।
कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पीलीभीत सदर से विधायक और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय गंगवार ने 2022 का विधानसभा चुनाव 6,930 मतों के अंतर से जीता था। उन्होंने मतदाता सूची में सामने आई कथित गड़बड़ियों पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने की मांग की। कांग्रेस ने इस प्रकरण में कानूनी कार्रवाई करने की बात भी कही है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, पीलीभीत के जिला निर्वाचन अधिकारी से कराई गई जांच में ईपीआईसी नंबर की ऑनलाइन खोज पर दूसरे मतदाता का विवरण सामने आने की पुष्टि हुई। इसके बाद विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और वीआरसी ऑपरेटर को मतदाता सूची से संबंधित कार्य से हटाने तथा उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की भूमिका पर भी रिपोर्ट मांगी गई है।
आयोग ने पीलीभीत की सभी विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की जांच कर दो दिन में रिपोर्ट देने को कहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को अपने-अपने जिलों की मतदाता सूचियों में ऐसी गड़बड़ियों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद अब जांच का दायरा बढ़ गया है। हालांकि, कांग्रेस की ओर से बताए गए सभी 16,554 मामलों की स्थिति और उनमें से कितने मामलों में वास्तविक अनियमितता पाई गई, इसका पूरा विवरण जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।
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