बिहार बाढ़: गंडक नदी के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी, फिलहाल टला बड़ा खतरा; 24 घंटे निगरानी जारी
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए बिहार के सीमावर्ती इलाकों में प्रशासन अलर्ट मोड पर है। मुजफ्फरपुर समेत गंडक नदी से प्रभावित जिलों में जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। वाल्मीकिनगर गंडक बराज से पानी के डिस्चार्ज में रात के समय कमी दर्ज की गई, हालांकि सुबह इसमें मामूली बढ़ोतरी हुई। रेवा घाट पर गंडक का जलस्तर फिलहाल खतरे के निशान से नीचे बताया जा रहा है।
प्रशासन के मुताबिक, अगले 48 घंटे महत्वपूर्ण हैं। संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए तटबंधों की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है और कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिए गए हैं। संबंधित अधिकारियों को किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बगहा, वाल्मीकिनगर, बेतिया और मोतिहारी का हवाई सर्वेक्षण कर संभावित प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी तत्परता के साथ राहत और बचाव की तैयारियां रखने तथा प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
गंडक नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए मुजफ्फरपुर के अलावा वैशाली, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज और सारण के कुछ हिस्सों में भी निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों के अनुसार, इन क्षेत्रों में कटाव का खतरा बना रहता है।
वाल्मीकिनगर गंडक बराज से सुबह करीब आठ बजे लगभग 93 हजार क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। पश्चिमी चंपारण से होकर यह पानी अन्य जिलों की ओर बढ़ता है और आगे वैशाली तथा सारण की सीमा के पास सोनपुर में गंगा नदी में मिल जाता है।
नेपाल में बाढ़ के हालात को देखते हुए रेलवे ने भी अपनी तैयारियां बढ़ा दी हैं। पूर्व मध्य रेल के समस्तीपुर मंडल में ट्रैक, पुल-पुलिया और जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है। ट्रैकमैन और पुलों की निगरानी करने वाले कर्मचारियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। रेलवे ने कहा है कि यदि किसी रेलखंड पर पानी बढ़ने से ट्रैक की सुरक्षा प्रभावित होती है तो यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रेनों का परिचालन रोका जा सकता है।
फिलहाल गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे होने के कारण बड़े खतरे की स्थिति नहीं है, लेकिन प्रशासन ने अगले 48 घंटों को संवेदनशील मानते हुए निगरानी और राहत-बचाव की तैयारियां तेज रखी हैं।
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