24 घंटे से अधिक अवैध हिरासत पर मिलेगा मुआवजा, इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आदेश
प्रयागराज (आरएनआई) Allahabad High Court ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों की रक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक अवैध रूप से हिरासत में रखा जाता है, तो उसे 25,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा दिया जाना चाहिए। साथ ही, विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर यह राशि संबंधित पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट के वेतन से वसूल की जाएगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति Siddharth और न्यायमूर्ति Vinay Kumar Dwivedi की खंडपीठ ने गाजियाबाद निवासी चंद्रपाल पाल सिंह एवं अन्य द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान दिया।
न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिया कि इस संबंध में सभी जिला पुलिस प्रमुखों को एक सर्कुलर जारी किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी व्यक्ति को कानून के प्रावधानों के विपरीत हिरासत में रखने की घटनाओं को रोका जा सके।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ताओं जितेंद्र राणा और राजर्षि गुप्ता ने अदालत को बताया कि चंद्रपाल पाल सिंह उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं तथा वे और उनकी पत्नी दोनों दिव्यांग हैं। याचिका के अनुसार, चंद्रपाल सिंह 13 फरवरी को अपने गांव जावली में भतीजी के विवाह समारोह में शामिल होने गए थे। इसी दौरान 17 फरवरी को उनके साले का निधन हो गया, जिसके बाद घटनाक्रम ने कानूनी विवाद का रूप ले लिया।
अदालत का यह फैसला संविधान द्वारा प्रदत्त व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और अवैध हिरासत जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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