17 लाख उपग्रहों से बदल सकती है रात की तस्वीर? वैज्ञानिकों ने अंतरिक्ष परियोजनाओं पर जताई गंभीर चिंता
पृथ्वी की निचली कक्षा में बड़ी संख्या में प्रस्तावित उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चिंता जताई है। यूरोपियन सदर्न ऑब्जर्वेटरी (ESO) के नए अध्ययन के अनुसार, यदि इन परियोजनाओं पर बिना पर्याप्त नियंत्रण के अमल हुआ तो रात का प्राकृतिक अंधकार प्रभावित हो सकता है, जिससे खगोलीय अनुसंधान और ब्रह्मांड की खोज पर बड़ा असर पड़ेगा।
प्रतिष्ठित शोध पत्रिका *Astronomy & Astrophysics* में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, पृथ्वी की निचली कक्षा में किसी भी समय अधिकतम लगभग एक लाख अपेक्षाकृत मंद उपग्रह ही सुरक्षित माने जा सकते हैं। इसके विपरीत विभिन्न कंपनियों और संस्थानों की योजनाओं में 17 लाख से अधिक उपग्रहों और अंतरिक्ष दर्पणों को कक्षा में भेजने का प्रस्ताव है, जो इस अनुमानित सीमा से कई गुना अधिक है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में उपग्रहों की मौजूदगी से दूरस्थ आकाशगंगाओं, पृथ्वी जैसे ग्रहों और अन्य खगोलीय पिंडों के अध्ययन में गंभीर बाधाएं आ सकती हैं। इससे रात के आकाश की प्राकृतिक दृश्यता भी प्रभावित होगी।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह चिंता वर्ष 2019 में तब बढ़ी, जब स्पेसएक्स ने अपनी स्टारलिंक इंटरनेट सेवा के पहले उपग्रह लॉन्च किए। लंबे एक्सपोजर वाली खगोलीय तस्वीरों में इन उपग्रहों की चमकीली लकीरें दिखाई देने लगीं। उस समय पृथ्वी की कक्षा में करीब 2,000 सक्रिय उपग्रह थे, जबकि अब यह संख्या 14,000 से अधिक हो चुकी है। निष्क्रिय उपग्रहों और अंतरिक्ष मलबे को मिलाकर यह आंकड़ा लगभग 32,000 तक पहुंच गया है।
ईएसओ के खगोलशास्त्री ओलिवियर हैनो ने पिछले 30 वर्षों के आंकड़ों और कंप्यूटर सिमुलेशन के आधार पर अध्ययन किया। उनके अनुसार, यदि उपग्रह सामान्य आंखों से दिखाई न देने जितने मंद भी हों, तब भी उनकी संख्या लगभग एक लाख से अधिक होने पर वेधशालाओं को होने वाला नुकसान मौसम या उपकरणों की खराबी से होने वाले सामान्य नुकसान के बराबर या उससे अधिक हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उपग्रहों की संख्या 50,000 के आसपास सीमित रहे तो वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए स्थिति कहीं अधिक बेहतर होगी।
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