मानसून का दोहरा असर: कहीं राहत तो कहीं आफत, पहाड़ों से मुंबई तक बारिश का कहर; कई राज्यों में अलर्ट
देश के लगभग 95 फीसदी हिस्सों तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पहुंच चुका है। जहां पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान में बारिश से भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, गुजरात और ओडिशा समेत कई राज्यों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, असम, नागालैंड और कर्नाटक के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। वहीं ओडिशा, गुजरात, अंडमान-निकोबार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र और विदर्भ में 12 से 20 सेंटीमीटर तक बेहद भारी बारिश हुई। कई राज्यों में 40 से 60 किमी प्रति घंटे और कुछ क्षेत्रों में 60 से 125 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं भी चलीं।
हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में एक बार फिर बादल फटने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर भारी मात्रा में मलबा आ गया। कई वाहन मलबे में दब गए, हालांकि सभी लोग सुरक्षित बचा लिए गए। उत्तराखंड में लगातार बारिश और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए पिथौरागढ़ की आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा अगले आदेश तक स्थगित कर दी गई है। प्रशासन ने फिलहाल इनर लाइन परमिट जारी करना भी रोक दिया है।
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी लगातार बारिश से कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। शुक्रवार को पांच घंटे के भीतर कई क्षेत्रों में तेज बारिश हुई, जबकि बांद्रा में सबसे अधिक 73.8 मिमी वर्षा दर्ज की गई। बीएमसी के अनुसार, सुबह 8 बजे तक बीते 24 घंटे में 100 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रशासन ने मेट्रो, लोकल ट्रेन और बस सेवाएं सामान्य रहने का दावा किया, हालांकि यात्रियों ने कई सेवाओं के देर से चलने की शिकायत की।
वहीं, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में बादल छाए रहने के बावजूद केवल हल्की बूंदाबांदी हुई। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताते हुए लोगों से सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने की अपील की है।
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