महाकाल में VIP एंट्री पर बवाल: सांसद फिरोजिया बोले— राजा हो या रंक, गर्भगृह सबके लिए खुले
उज्जैन (आरएनआई) सांसद अनिल फिरोजिया ने महाकाल मंदिर में वीआईपी प्रवेश को लेकर उठे विवाद के बीच बड़ा बयान दिया है। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि बाबा महाकाल के दर्शन और स्पर्श का अधिकार केवल चुनिंदा लोगों तक सीमित नहीं होना चाहिए। यदि गर्भगृह में प्रवेश की व्यवस्था है तो उसका लाभ आम श्रद्धालुओं को भी मिलना चाहिए। सांसद बोले कि कि प्रशासन आम श्रद्धालुओं के साथ भेदभाव कर रहा है। अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे किसी राजसिंहासन पर नहीं बैठे हैं। आज पद है, कल नहीं रहेगा, लेकिन बाबा महाकाल के दरबार में सबको जवाब देना होगा। लोगों के साथ अन्याय और पद का दुरुपयोग अंततः यहीं भुगतना पड़ता है। सांसद ने सुझाव दिया कि प्रतिदिन कम से कम एक या दो घंटे के लिए महाकाल मंदिर का गर्भगृह सभी भक्तों के लिए खोला जाना चाहिए, ताकि राजा और रंक के बीच किसी प्रकार का भेदभाव न रहे। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि बाबा महाकाल के दरबार में सभी समान हैं।
दरअसल, हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो वायरल हुए हैं, जिनमें आधा दर्जन लोग महाकाल मंदिर के गर्भगृह के भीतर पूजा-अर्चना और जलाभिषेक करते दिखाई दे रहे हैं। जबकि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश प्रतिबंधित है और विशेष परिस्थितियों में ही जिला प्रशासन की अनुमति से प्रवेश दिया जाता है। जानकारी के अनुसार 15 जून की रात वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत कुछ लोग मंदिर पहुंचे और गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। बाद में उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने से आम श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली। बताया जा रहा है कि तस्वीरों में दिखाई देने वाले अक्षय आनंद नामक व्यक्ति ने स्वयं इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर साझा किया था।
मंदिर प्रशासन ने स्वीकार किया है कि संबंधित लोग वीआईपी पास के माध्यम से मंदिर पहुंचे थे। हालांकि पास किसकी अनुशंसा पर और किन नामों से जारी हुए, इस संबंध में अब तक स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
-श्रद्धालुओं में दो तरह की प्रतिक्रिया
एक ओर कुछ लोग सांसद के इस सुझाव का समर्थन कर रहे हैं कि बाबा महाकाल के दरबार में सभी भक्तों को समान अवसर मिलना चाहिए। वहीं दूसरी ओर मंदिर की सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और परंपरागत व्यवस्थाओं को देखते हुए विशेषज्ञ मानते हैं कि गर्भगृह को आम श्रद्धालुओं के लिए खोलने से पहले विस्तृत योजना बनाना आवश्यक होगा।
-सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंधित है, तो ये विशेष श्रद्धालु आखिर अंदर पहुंचे कैसे? क्या इनके लिए नियम बदल दिए गए थे? यदि अनुमति दी गई थी तो किस आधार पर दी गई? और यदि बिना अनुमति प्रवेश हुआ तो जिम्मेदार कौन है?
आम श्रद्धालु घंटों कतारों में खड़े रहते हैं, कई बार सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा कर सिर्फ दूर से दर्शन कर लौट जाते हैं। वहीं कुछ लोगों का सीधे गर्भगृह तक पहुंच जाना व्यवस्था की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
-महाकाल के दरबार में आस्था का अधिकार सबका समान है, लेकिन तस्वीरें कुछ और कहानी कह रही हैं। सवाल यह नहीं है कि गर्भगृह में कौन गया, सवाल यह है कि जिन दरवाजों पर करोड़ों भक्तों के लिए ताला लगा है, वे आखिर चुनिंदा लोगों के लिए बार-बार कैसे खुल जाते हैं?
यदि नियम हैं तो सबके लिए हों, और यदि अपवाद हैं तो उनका सार्वजनिक रिकॉर्ड भी होना चाहिए। वरना यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा कि महाकाल के दरबार में भी "वीआईपी पास" आस्था से बड़ा हो गया है।
-न्यायाधीशों के नाम पर मनमानी
मंदिर प्रशासन मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है महाकाल के गर्भगृह के भीतर दर्शन से संबंधित वायरल तस्वीरों के मामले में मंदिर प्रशासन का कहना है कि अक्षय आनंद नाम का भक्त 15 जून को किसी ज्यूडिशियल वीआईपी प्रोटोकॉल से आया था, ऐसे में सवाल है कि आखिर वे जज महोदय कौन थे, जो व्यवस्था से भी बड़े हो गए । क्या नियम तोड़ने के लिए उन्हें सजा नहीं मिलनी चाहिए ।
-क्लब चलाने वाले से ज्यूडिशियल का क्या रिश्ता
जुडिशल vip प्रोटोकॉल से गर्भ ग्रह के भीतर प्रवेश करने वाला अक्षय आनंद दिल्ली-मुम्बई व अन्य बड़े शहरों में क्लब और बार का संचालन करता है, ऐसे में यह सवाल भी खड़ा होता है कि आखिर जुडिशल के लोगों का क्लब व बार मालिकों से क्या रिश्ता है...!
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