"भगवान किसी को कुछ नहीं देते, फिर भी सबकी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं" : मुनि श्री सुधासागर जी
गुना।(आरएनआई) इस दुनिया में चारों ओर पवित्र आत्मायें रहती है परंतु हमने उन्हें गंदा कर अपवित्र कर दिया है। जो थाली भरकर भगवान के पास आता है और भगवान उसे कुछ भी नहीं देता है तो वही सच्चा भगवान है। मुनि पुगव श्री सुधासागर जी महाराज ने आज धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किये है।

मुनि श्री ने कहा इस संसार में पवित्र आत्माएं विचरण करती है परंतु हमने उन आत्माओं को गंदा कर अपवित्र कर दिया है। जो हमारे देखने लायक दृश्य है हम उन्होंने नहीं देखते है,जो सुनाने लायक है हम उसे नहीं सुनाते है। शास्त्र के गवाक्ष से देखे तो तरस आता है, यही हमारा दुर्भाग्य होता है। उन्होंने कहा जब अच्छे लोग चले जाते है तब उनकी कीमत समझ आती है। जैसे हमने जैन कुल में जन्म लिया। उसकी कीमत नहीं मालूम परन्तु जब जैन कुल चला जाएगा तब उसकी कीमत मालूम होगी तब विचार आयेगा कि भूल हो गयी। उन्होंने कहा सभी नियम भगवान के लिए नहीं बने है जब मूलाचाल ग्रन्थ पड़ता हु तो संसार की वास्तविकता समझ मे आती है, क्या सही है और हमे क्या करना चाहिए था। उन्होंने कहा लोग भगवान महावीर का कोर्स देखकर घबरा जाते है जबकि भगवान महावीर ने जो लिखा है वही सही है और संसार से पार लगायेगा। जैन सिद्धांत के अनुसार हमारा भगवान किसी को कुछ भी नहीं देता है तो फिर भी लोग थाली भर-भर लाते है और खाली हाथ जाते है और उनके सभी कार्य सिद्ध हो जाते है। कुछ दरवाजे ऐसे होते जहां थाली भरकर ले जाते है और खाली हाथ आते है तो वही त्रिलोकीनाथ कहलाते है।

उन्होंने भगवान के गर्व कल्याणक पर प्रकाश डालते हुए कहा जब भगवान गर्व में आते है तो राजा नाभिराया के आगन में छः माह पहले से साढ़े दस करोड़ रत्नों की वर्षा प्रति दिन होने लगती है उस समय कोई भी गरीब नहीं होता, कोई दुखी नहीं होता, कोई बीमार नहीं होता, किसी की अकाल मौत नहीं होती, कोई आत्म हत्या नहीं करता, कोई व्यसन नहीं करता है और यह व्यवस्था साढ़े बारह योजन यानी 48 किलो मीटर तक रहता है। पिता की महिमा बताते हुए उन्होंने का जब बेटा ऐसा होता है तो पिता कैसा होता होगा कि इतने रत्नों की वर्षा छः माह पहले से होती है और पंद्रह माह तक होती रहती तब भी राजा नाभिराय एक भी रत्न अपने पास खजाने में नहीं रखता हैं सब प्रजा के लिए खोल देता है। ऐसे दानी पिता के यहां भगवान गर्व में आयेंगे आज उन्हीं भगवान का गर्व कल्याणक पूर्वार्ध है।
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