पुतिन का बदला रुख: नाटो के इलाके तक पहुंच सकता है रूस का खतरा
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अब ऐसे उकसावे वाले कदमों को मंजूरी देने के लिए पहले से ज्यादा तैयार हो सकते हैं। अमेरिकी खुफिया अधिकारियों के मुताबिक, इसका असर नाटो के इलाके तक पहुंच सकता है।
सीबीएस ने मामले की जानकारी रखने वाले अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि रूस की संभावित कार्रवाइयों में हाइब्रिड अभियान, साइबर हमले और ऐसे अन्य कदम शामिल हो सकते हैं, जिनमें रूस की सीधी भूमिका साबित करना मुश्किल हो। हालांकि, ये कदम बड़े स्तर के पारंपरिक सैन्य अभियान से कम होंगे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कुछ महीने पहले की तुलना में पुतिन के जोखिम उठाने के तरीके में बदलाव आया है।
रूस का मकसद क्या हो सकता है?
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका मुख्य उद्देश्य बड़ा युद्ध शुरू करना नहीं है। इसके बजाय रूस नाटो की एकता को परखना और यह देखना चाहता है कि अगर नाटो के किसी सदस्य देश पर हमला होता है, तो ट्रंप प्रशासन किस तरह प्रतिक्रिया देता है।
अमेरिकी खुफिया आकलन के अनुसार, रूस ऐसे कदमों के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों की प्रतिक्रिया का अंदाजा लगाने की कोशिश कर सकता है। इससे नाटो देशों के बीच सुरक्षा और सामूहिक जवाब को लेकर भी दबाव बढ़ सकता है।
पुतिन ने पश्चिमी देशों पर क्या आरोप लगाया था?
पिछले महीने की शुरुआत में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों पर 'दोहरा मापदंड' अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिमी देश अपने हित के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र चार्टर का इस्तेमाल करते हैं और जब यह उनके हित में नहीं होता, तब राष्ट्रों के 'आत्मनिर्णय' के सिद्धांत को नजरअंदाज करते हैं।
पश्चिमी प्रतिबंधों को लेकर पुतिन ने क्या दावा किया?
पुतिन ने दावा किया था कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहे हैं। उन्होंने कहा कि 2022 से पश्चिम ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों को पूरी रफ्तार दी और रिकॉर्ड संख्या में प्रतिबंध लगाए, लेकिन ये प्रतिबंध अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर सके।
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