पद्मश्री अखाड़ा गुरु भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ का निधन, राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई
सागर में अखाड़ा परंपरा के प्रख्यात गुरु और पद्मश्री से सम्मानित भगवानदास रायकवार ‘दाऊ’ का निधन हो गया। उनके निधन से बुंदेलखंड सहित पूरे प्रदेश में शोक की लहर है। 83 वर्षीय दाऊ जी ने अंतिम सांस AIIMS भोपाल में उपचार के दौरान ली, जहां वे पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार थे।
उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास से शुरू हुई, जिसमें अखाड़ा दलों की पारंपरिक झलक देखने को मिली। ढोल-नगाड़ों और लेज़म के साथ निकली इस यात्रा ने उनकी जीवनभर की साधना को जीवंत कर दिया। नरयावली नाका स्थित श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार से पहले अखाड़ा दलों ने शस्त्र प्रदर्शन कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनके पुत्र राजकुमार रायकवार ने लाठी प्रदर्शन कर पिता को अंतिम विदाई दी और मुखाग्नि दी।
प्रशासन की ओर से भी उन्हें पूर्ण सम्मान दिया गया। कलेक्टर प्रतिभा पाल के निर्देश पर अधिकारियों ने मुक्तिधाम पहुंचकर पुष्पचक्र अर्पित किया और तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि दी गई। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
इस दुखद अवसर पर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि दाऊ जी का निधन प्रदेश और देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार को इस दुख को सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
दाऊ जी ने अपना पूरा जीवन बुंदेलखंड की पारंपरिक शस्त्र कला ‘अखाड़ा’ को समर्पित किया। उनके प्रयासों से इस कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वर्ष 2026 के लिए उन्हें पद्मश्री के लिए चयनित किया गया था, जो उनके योगदान का बड़ा सम्मान है।
उनके निधन के साथ ही अखाड़ा परंपरा का एक स्वर्णिम अध्याय समाप्त हो गया। दाऊ जी की विरासत आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक युद्धकला के संरक्षण के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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