खेत से मैदान तक: एशियन चैंपियन तान्या चौधरी की मेहनत, अब कॉमनवेल्थ में पदक का लक्ष्य
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के गांधी गांव की रहने वाली एशियन चैंपियन हैमर थ्रो खिलाड़ी तान्या चौधरी अपनी मेहनत और संघर्ष से एक मिसाल बनकर उभरी हैं। खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद वह जमीन से जुड़ी हुई हैं और घर लौटकर खेतों में फसल काटकर अपने परिवार का हाथ भी बंटा रही हैं।
तान्या अब तक आठ स्वर्ण पदक सहित 15 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं, लेकिन उनकी नजर अब कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पदक जीतने पर टिकी है। उनका यह सफर आसान नहीं रहा। वर्ष 2016 में उन्होंने घर पर ही हैमर थ्रो का अभ्यास शुरू किया था और 2020 में प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, जहां उन्हें कोई सफलता नहीं मिली।
शुरुआती असफलताओं के बावजूद तान्या ने हार नहीं मानी। उन्होंने भारतीय स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा से प्रेरणा लेकर लगातार अभ्यास जारी रखा। मेहनत रंग लाई और 2025 में खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
इसके बाद तान्या ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार पदक जीतते हुए अपने जिले और देश का नाम रोशन किया। आज वह न सिर्फ एक सफल खिलाड़ी हैं, बल्कि उन युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
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