कानपुर में ‘किडनी मंडी’ का भंडाफोड़: 5–10 लाख में खरीद, 1 करोड़ तक में बिक्री, 50 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट का खुलासा
कानपुर (आरएनआई)। उत्तर प्रदेश के कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह जरूरतमंद लोगों से पांच से दस लाख रुपये में किडनी खरीदता था और उसे गंभीर मरीजों को एक करोड़ रुपये तक में बेच देता था। पिछले दो वर्षों में इस नेटवर्क ने 50 से अधिक अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराए, जिनमें विदेशी मरीज भी शामिल हैं।
मामले का खुलासा 29 मार्च को एक संदिग्ध ट्रांसप्लांट के बाद हुआ, जब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई अस्पतालों में छापेमारी की। जांच के दौरान इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, एक दलाल शिवम अग्रवाल और तीन अस्पताल संचालकों को गिरफ्तार किया गया। सभी आरोपियों को जेल भेज दिया गया है।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क बेहद सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था। गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर किडनी ली जाती थी, जबकि मरीजों से भारी रकम वसूली जाती थी। ट्रांसप्लांट के बाद कागजी हेरफेर कर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में गॉल ब्लैडर की पथरी का मरीज बताकर भर्ती करा दिया जाता था, ताकि किसी को शक न हो।
जांच में यह भी सामने आया है कि 3 मार्च को दक्षिण अफ्रीका की एक महिला का भी इसी नेटवर्क के जरिए अवैध ट्रांसप्लांट किया गया था, जिससे गिरोह के अंतरराष्ट्रीय संबंधों का संकेत मिलता है। पुलिस ने मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम के तहत 15 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है और अन्य फरार सदस्यों की तलाश में टीमें दिल्ली और नोएडा भेजी गई हैं।
पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआत एक गुप्त सूचना से हुई थी, जिसके बाद लगातार निगरानी और छापेमारी कर इस बड़े रैकेट का खुलासा किया गया। फिलहाल जांच जारी है और आशंका है कि आने वाले दिनों में इस नेटवर्क से जुड़े और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
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