सेना की ताकत में बड़ा इजाफा: 500 किमी मारक क्षमता वाले स्वदेशी ड्रोन ‘दिव्यास्त्र MK-1’ का सफल परीक्षण
भारतीय रक्षा क्षेत्र को बड़ी सफलता मिली है। राजस्थान के जोधपुर रेगिस्तान में अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच स्वदेशी रूप से विकसित यूएवी (ड्रोन) **दिव्यास्त्र MK-1** का सफल परीक्षण किया गया। 53 डिग्री सेल्सियस की भीषण गर्मी और 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली तेज हवाओं के बावजूद ड्रोन ने सभी निर्धारित मिशन उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
परीक्षण के दौरान सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दिव्यास्त्र MK-1 ने अपनी उन्नत युद्धक और निगरानी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। ड्रोन ने लक्ष्य की स्वायत्त पहचान कर **टर्मिनल डाइव अटैक** तकनीक के जरिए सटीक हमला किया। यह क्षमता आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने में बेहद प्रभावी मानी जाती है।
दिव्यास्त्र MK-1 की सबसे बड़ी विशेषताओं में इसकी **500 किलोमीटर तक की परिचालन रेंज** और **लगातार पांच घंटे तक उड़ान भरने की क्षमता** शामिल है। परीक्षण के दौरान ड्रोन ने लाइव आईएसआर (इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) डेटा तथा वास्तविक समय की टोही तस्वीरें सीधे ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन तक पहुंचाईं, जिससे अधिकारियों ने इसकी निगरानी और युद्धक्षेत्र मूल्यांकन क्षमता का आकलन किया।
ड्रोन विकसित करने वाली कंपनी के अनुसार, कठिन मौसम में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन यह साबित करता है कि दिव्यास्त्र MK-1 विभिन्न भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियों में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्वदेशी ड्रोन भारतीय सेना की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमले की क्षमताओं को नई मजबूती प्रदान करेगा।
सफल परीक्षण के बाद दिव्यास्त्र MK-1 के सेना में शामिल होने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ने की संभावना है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
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