अल नीनो का असर: कम बारिश की आशंका के बीच खरीफ फसलों को बचाने के लिए सरकार अलर्ट, बने विशेष निगरानी समूह
अल नीनो के प्रभाव के चलते इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश होने के अनुमान ने केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ फसलों पर संभावित सूखे और वर्षा की कमी के असर को कम करने के लिए केंद्र ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। सरकार ने फसलों की स्थिति पर नजर रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए ‘फसल मौसम निगरानी समूह’ और ‘संकट प्रबंधन समूह’ का गठन किया है।
केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे कम अवधि में पकने वाली फसलों के बीजों का कम से कम एक प्रतिशत बफर स्टॉक तैयार रखें, ताकि बारिश कम होने की स्थिति में किसानों को वैकल्पिक फसल विकल्प उपलब्ध कराए जा सकें। इसके साथ ही राज्यों को जिला स्तर पर आपातकालीन कृषि योजनाएं तैयार करने के लिए भी कहा गया है।
मंत्रालय ने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के सहयोग से जिला-स्तरीय संकट प्रबंधन योजनाएं तैयार की जा रही हैं, जिससे मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों में किसानों को त्वरित सहायता मिल सके। उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी सरकार ने विशेष तैयारी की है। इस बार सामान्य 33 प्रतिशत के मुकाबले करीब 51 प्रतिशत उर्वरकों का अग्रिम भंडारण किया गया है।
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, अल नीनो के कारण इस वर्ष मानसून के दौरान सामान्य वर्षा का लगभग 90 प्रतिशत ही बारिश होने का अनुमान है। इसे देखते हुए सरकार ने खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की मांग का पुनर्मूल्यांकन भी किया है। यूरिया और डीएपी की मांग में कटौती का अनुमान लगाया गया है, जबकि देश में पर्याप्त भंडार उपलब्ध होने का दावा किया गया है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून कमजोर रहता है तो धान, दालों और तिलहन जैसी खरीफ फसलों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में केंद्र और राज्य सरकारें पहले से तैयारियों में जुट गई हैं, ताकि किसानों को किसी बड़े नुकसान से बचाया जा सके और खाद्य सुरक्षा पर कोई असर न पड़े।
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