भारत के श्रम बाजार में बड़ा बदलाव: घर संभालने वाली महिलाओं को नौकरी के अधिक अवसर
एसबीआई रिसर्च की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत का महिला श्रम बाजार तेजी से बदल रहा है। शिक्षा, आर्थिक जिम्मेदारी और सामाजिक भूमिका में बढ़ती भागीदारी के कारण महिलाओं की नियमित वेतन वाले रोजगार में हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। रिपोर्ट बताती है कि जो महिलाएं अपने परिवार की मुखिया हैं, उनके नियमित नौकरी पाने की संभावना अन्य महिलाओं की तुलना में 4.4 प्रतिशत अधिक है।
विश्लेषण के मुताबिक, परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी संभालने वाली महिलाएं अस्थायी और अनौपचारिक काम छोड़कर अधिक स्थिर और सुरक्षित रोजगार की ओर बढ़ रही हैं। वहीं अनौपचारिक मजदूरी में उनकी भागीदारी करीब 4.2 प्रतिशत कम देखी गई है।
यह अध्ययन पहली बार पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के यूनिट-लेवल डेटा के आधार पर तैयार किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में यह बदलाव सबसे ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहा है। शहरों में महिला मुखिया होने का संबंध नियमित वेतन वाली नौकरियों में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से जुड़ा पाया गया, जबकि स्वरोजगार में गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में शिक्षा को सबसे बड़ा निर्णायक कारक बताया गया है। जिन महिलाओं ने उच्च माध्यमिक या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है, उनके नियमित रोजगार में शामिल होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हायर सेकेंडरी और उससे ऊपर पढ़ी महिलाओं में नियमित वेतन वाले रोजगार की संभावना 0.44 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, जबकि अनौपचारिक मजदूरी में जाने की संभावना घटकर 0.03 प्रतिशत रह जाती है।
इसके विपरीत, कम पढ़ी-लिखी महिलाओं के अनौपचारिक मजदूरी में शामिल होने की संभावना अधिक पाई गई। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि महिलाओं के लिए स्थायी और सुरक्षित रोजगार बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच का विस्तार बेहद जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बदलाव के संकेत दिखाई दिए हैं। वहां यदि महिलाएं परिवार की जिम्मेदारी संभालती हैं, तो उनकी अनौपचारिक मजदूरी में शामिल होने की संभावना लगभग पांच प्रतिशत कम हो जाती है। साथ ही नियमित रोजगार और स्वरोजगार दोनों में हल्का सुधार देखा गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि परिवहन क्षेत्र में नियमित वेतन वाली नौकरियां हासिल करने में महिलाएं पुरुषों से आगे निकल रही हैं। हालांकि खनन और भारी उद्योग जैसे क्षेत्रों में महिलाओं की हिस्सेदारी अब भी पुरुषों की तुलना में कम बनी हुई है।
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