पश्चिमी यूपी की सियासत में संभल हिंसा और जौहर यूनिवर्सिटी बन सकते हैं बड़े चुनावी मुद्दे
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पश्चिमी यूपी की राजनीति में संभल हिंसा और रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी प्रमुख चुनावी मुद्दों के रूप में उभरते दिखाई दे रहे हैं। भाजपा और समाजवादी पार्टी दोनों इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रही हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संभल हिंसा मामले की न्यायिक जांच रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने का समय चुनावी दृष्टि से अहम साबित हो सकता है। रिपोर्ट में संभल हिंसा को कथित तौर पर सुनियोजित साजिश बताया गया है और कुछ जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। माना जा रहा है कि इस रिपोर्ट को भाजपा चुनावी अभियान में प्रमुखता से उठाएगी।
वहीं समाजवादी पार्टी जौहर यूनिवर्सिटी को शिक्षा और छात्रों के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार को घेरने की तैयारी में है। दूसरी ओर भाजपा यूनिवर्सिटी की स्थापना, उसे अल्पसंख्यक दर्जा मिलने और तत्कालीन सपा सरकार के फैसलों को लेकर विपक्ष पर निशाना साध सकती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि विधानसभा में इन दोनों मुद्दों पर होने वाली बहस का असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ सकता है और यह चर्चा चुनावी माहौल में भी प्रमुख स्थान बना सकती है।
संभल की राजनीति में सांसद जियाउर्रहमान बर्क और विधायक नवाब इकबाल महमूद के परिवार लंबे समय से प्रभावशाली रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में भी बर्क और इकबाल परिवार की राजनीतिक भूमिका चर्चा के केंद्र में रह सकती है।
हालांकि चुनावी रणनीति और उम्मीदवारों को लेकर सभी दलों की अंतिम तस्वीर आने वाले समय में ही साफ होगी।
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