पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव: दुबई मरीना के टावर को मलबे से नुकसान, कुवैत में तेल उत्पादन घटा; भारत हालात पर सतर्क
पश्चिम एशिया (आरएनआई)। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ती सैन्य कार्रवाई तथा अमेरिका की सक्रिय भूमिका के चलते पूरे क्षेत्र में तनाव गहरा गया है। मिसाइलों और ड्रोन हमलों के बीच यह संघर्ष अब आठवें दिन में पहुंच चुका है। तेजी से बदलते हालात को देखते हुए भारत ने भी स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है।
इस बीच दुबई प्रशासन ने पुष्टि की है कि दुबई मरीना इलाके में स्थित एक टावर को मलबे से हल्का नुकसान पहुंचा है। अधिकारियों के अनुसार एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में एक संभावित खतरे को बीच में ही रोक दिया था, जिसके बाद उसके कुछ टुकड़े नीचे गिर गए। मलबे के गिरने से टावर के एक हिस्से को नुकसान हुआ, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके को घेर लिया और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार सार्वजनिक बयान देते हुए कहा कि देश युद्ध जैसी परिस्थितियों का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि यूएई अपनी जनता और देश की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी खतरे का डटकर सामना करेगा।
क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयासों के तहत कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलट्टी से फोन पर बातचीत की। दोनों नेताओं ने क्षेत्र में बिगड़ती सैन्य स्थिति और उसके वैश्विक सुरक्षा पर पड़ने वाले प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने तनाव कम करने और विवाद के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीतिक रास्ता अपनाने पर जोर दिया।
इसी बीच ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दावा किया है कि उसने बहरीन के जुफैर इलाके में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे को मिसाइलों से निशाना बनाया। आईआरजीसी के अनुसार यह हमला क़ेशम में एक विलवणीकरण संयंत्र पर हुए अमेरिकी हमले के जवाब में किया गया। बहरीन के गृह मंत्रालय ने भी हवाई हमले के सायरन बजने की पुष्टि करते हुए लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को सही ठहराते हुए कहा कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने के बहुत करीब पहुंच गया था। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि अमेरिका को मजबूरी में यह कार्रवाई करनी पड़ी, क्योंकि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो ईरान जल्द ही परमाणु बम बना सकता था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईरान पश्चिम एशिया में प्रभुत्व स्थापित करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब उसकी स्थिति कमजोर हो गई है।
संघर्ष के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। कुवैत में तेल उत्पादन में कमी की खबरें सामने आई हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में भारत समेत कई देश स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
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