छतरपुर में फिर गूंजा "चिता आंदोलन" आदिवासी महिलाओं ने नदी में उतरकर गले में फंदा डाला
3 जुलाई से बराना नदी किनारे, कूपी गांव के पास केन-बेतवा प्रोजेक्ट के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन फिर तेज हो गया है। मिट्टी और जल सत्याग्रह के साथ "फांसी सत्याग्रह" भी जारी है, नारा गूंज रहा है- "न्याय दो या मार दो।" प्रभावितों की मांग साफ है -सही पुनर्वास, मुआवजे में महिला-पुरुष बराबरी, गड़बड़ भुगतान की निष्पक्ष जांच, मानसून में जबरन तोड़फोड़ बंद हो, और वन अधिकार कानून का पूरा पालन हो।

छतरपुर में 5,288 और पन्ना में 1,400 परिवार विस्थापन की कगार पर हैं, जिनमें ज्यादातर गोंड-कोल आदिवासी समुदाय से हैं। साथ ही पन्ना टाइगर रिजर्व का 10,500 हेक्टेयर जंगल भी डूबने वाला है।
सवाल यह नहीं कि विकास सही है या गलत सवाल यह है कि यह विकास आखिर किसकी कीमत पर हो रहा है।
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