गुना में बीच सड़क भिड़े आवारा सांड, बड़ा हादसा टला; जिम्मेदारों पर उठे सवाल
गुना (आरएनआई) शहर की यातायात व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा भगवान भरोसे चल रही है। जिला मुख्यालय के हृदय स्थल कहे जाने वाले मुख्य मार्ग पर केनरा बैंक के सामने रविवार को आवारा सांडों ने जमकर उत्पात मचाया। बीच सड़क पर दो सांडों के बीच हुई इस खूनी लड़ाई के चलते मार्ग पर अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। सांडों की इस भिड़ंत के दौरान वहां से गुजर रहे कई दुपहिया और चार पहिया वाहन चालक गंभीर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बचे। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों ने बमुश्किल इधर-उधर भागकर अपनी जान बचाई।
जिम्मेदार जानकर भी अनजान, लगातार बढ़ रहा जान का खतरा
शहर के व्यस्ततम इलाकों में आवारा जानवरों का यह आतंक कोई नई बात नहीं है, लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि नगर पालिका प्रशासन और यातायात थाना प्रभारी सब कुछ जानकर भी पूरी तरह अनजान बने हुए हैं। शहर के मुख्य बाजारों से लेकर चौराहों तक आवारा मवेशियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, जो अब सीधे तौर पर आम जनता की जान के दुश्मन बन चुके हैं। न तो नगर पालिका इन जानवरों को पकड़कर गौशाला भेजने या हांकने का कोई ठोस प्रबंध कर रही है और न ही यातायात विभाग सड़कों को जाम मुक्त कराने के लिए कोई रुचि दिखा रहा है।
रात में हादसों को न्योता, सिर्फ चालानी कार्रवाई तक सीमित अधिकारी
ट्रैफिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त रखने का दम भरने वाले यातायात विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि रात के समय इन आवारा मवेशियों के कारण अंधेरे में गंभीर हादसे होते हैं, लेकिन इनसे बचाव के लिए जिम्मेदार अधिकारियों ने कभी इन जानवरों के सींगों या गले में रेडियम पट्टी तक लगाने की जहमत नहीं उठाई। शहर की जनता का कहना है कि यातायात विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और अमला रोजाना केवल और केवल मुख्य चौराहों पर खड़े होकर चालान वसूली और राजस्व जुटाने तक ही सीमित रह गए हैं, जबकि सड़कों पर मौत बनकर घूम रहे इन आवारा जानवरों से जनता को निजात दिलाने की ओर उनका कोई ध्यान नहीं है।
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