खाकी का 'अमानवीय' चेहरा: 80 वर्षीय बुजुर्ग रिटायर्ड डीएसपी के साथ अपराधियों जैसा सलूक!

Monday, April 13, 2026 - 14:44
Updated: 7 months ago
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खाकी का 'अमानवीय' चेहरा: 80 वर्षीय बुजुर्ग रिटायर्ड डीएसपी के साथ अपराधियों जैसा सलूक!

पन्ना (आरएनआई)क्या पुलिस की वर्दी पहनते ही मानवीय संवेदनाएं खत्म हो जाती हैं? क्या नियम केवल डराने के लिए हैं, समझाने के लिए नहीं? मध्य प्रदेश के पन्ना जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 40 साल तक विभाग की सेवा करने वाले एक बुजुर्ग रिटायर्ड अधिकारी को वर्तमान पुलिसकर्मियों ने सड़क पर अपमानित किया और उनके खिलाफ संगीन धाराओं में FIR दर्ज कर दी।

मामला क्या है?

घटना 7 अप्रैल की है। मडला थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक गाड़ी को रोका। गाड़ी में 80 वर्षीय रिटायर्ड डीएसपी भरत सिंह चौहान अपनी 75 वर्षीय पत्नी राजश्री चौहान के साथ जा रहे थे। अपराध सिर्फ इतना था कि उम्र के इस पड़ाव पर याददाश्त खो चुके चौहान साहब सीट बेल्ट लगाना भूल गए थे।

पुलिस की 'बहादुरी' या बदतमीजी?

प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो के अनुसार, मडला थाना प्रभारी रचना पटेल और उनकी पूरी टीम ने बुजुर्ग दंपत्ति को इस तरह घेरा जैसे वे कोई आतंकवादी हों। भरत सिंह चौहान की पत्नी बार-बार गुहार लगाती रही कि उनके पति मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं, उन्हें याददाश्त की समस्या है (Memory Loss) और वे किडनी व हार्ट के मरीज हैं। संवेदना दिखाने के बजाय, पुलिसकर्मी उनसे उलझते रहे। जब बुजुर्ग अधिकारी ने आत्मसम्मान में गिरफ्तारी की बात कही, तो पूरी पुलिस टीम उन पर टूट पड़ी।

FIR की 'झड़ी' और लाइसेंसी हथियार का विवाद

पुलिस ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हुए इस बुजुर्ग दंपत्ति पर धारा 296, 132, 351, 221, 35 और आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धाराएं लगा दीं। आरोप लगाया गया कि उन्होंने सरकारी काम में बाधा डाली। पत्नी के पास अपनी सुरक्षा के लिए रखा गया लाइसेंसी हथियार भी पुलिस के लिए 'अवैध' कार्रवाई का जरिया बन गया। हालांकि, कोर्ट ने मामले की गंभीरता और उम्र को देखते हुए तत्काल जमानत दे दी।

DGP और मुख्यमंत्री से सीधे सवाल

इस खबर के माध्यम से मध्य प्रदेश के DGP कैलाश मकवाना और मुख्यमंत्री (गृह मंत्री) से कुछ अहम सवाल पूछे जा रहे हैं:

क्या पुलिस ट्रेनिंग एकेडमी (PTS) में बुजुर्गों के साथ व्यवहार करने की शिक्षा नहीं दी जाती?

क्या 80 साल के बीमार बुजुर्ग से 'शासकीय कार्य में बाधा' का खतरा था?

क्या इस अमानवीय व्यवहार के लिए जिम्मेदार थाना प्रभारी और स्टाफ पर कार्रवाई होगी?

पुलिस अधिकारियों में रोष

आज पूरे प्रदेश के रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों में इस घटना को लेकर भारी रोष है। इंदौर से लेकर पन्ना तक पेंशनर एसोसिएशन ज्ञापन देने की तैयारी में है। नियम अपनी जगह हैं, लेकिन अगर पुलिस में मानवीय चेहरा नहीं बचा, तो जनता का विश्वास इस खाकी से पूरी तरह उठ जाएगा। इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, बुजुर्ग दंपत्ति पर दर्ज झूठी FIR वापस ली जाए और पुलिस बल को 'सेंसिटाइजेशन' की ट्रेनिंग दी जाए।

जब खाकी अपनी संवेदना खो देती है... 

"क्या महज एक सीट बेल्ट न लगा पाना इतना बड़ा गुनाह है कि 80 साल के बुजुर्ग को अपराधी बना दिया जाए? जिस शख्स ने अपनी पूरी जिंदगी खाकी को दी, सैकड़ों पुलिस अफसर तैयार किए और विभाग को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया, आज उसी 'गुरु' के साथ कल के भर्ती हुए जवान 'तू-तड़ाक' और बदतमीजी कर रहे हैं। यह पुलिसिंग नहीं, वर्दी का शुद्ध अहंकार है। जब खाकी अपनी संवेदना खो देती है, तो वह रक्षक नहीं बल्कि भक्षक नजर आने लगती है। क्या मध्य प्रदेश पुलिस की ट्रेनिंग में अब बुजुर्गों और अपने ही वरिष्ठों का सम्मान करना नहीं सिखाया जाता?"

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