केरल पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज, शशि थरूर ने वाम सरकार की आर्थिक नीतियों पर उठाए सवाल
केरल की वित्तीय स्थिति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने राज्य की वामपंथी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया है कि बढ़ते कर्ज के बावजूद सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य का कुल ऋण 5 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुका है और सरकार को कर्मचारियों के वेतन, पेंशन तथा बोनस जैसी नियमित देनदारियों के लिए भी उधार का सहारा लेना पड़ रहा है।
थरूर ने कहा कि जिस "केरल मॉडल" को लंबे समय तक विकास और सामाजिक कल्याण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया, उसकी आर्थिक चुनौतियां अब सामने आ रही हैं। उनका आरोप है कि लगातार बढ़ते राजकोषीय बोझ और ऋण निर्भरता ने राज्य की वित्तीय सेहत पर दबाव बढ़ा दिया है।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को राजस्व बढ़ाने, खर्चों में संतुलन लाने और दीर्घकालिक वित्तीय सुधारों पर ध्यान देना चाहिए। उनके अनुसार, केवल उधार लेकर नियमित सरकारी खर्चों का प्रबंधन करना लंबे समय तक टिकाऊ नहीं माना जा सकता।
वहीं, सत्तारूढ़ Communist Party of India (Marxist) और Left Democratic Front लगातार यह तर्क देते रहे हैं कि राज्य की वित्तीय चुनौतियों के पीछे केंद्र-राज्य वित्तीय संबंध, जीएसटी मुआवजा और उधारी पर लगाए गए प्रतिबंध भी महत्वपूर्ण कारण हैं। सरकार का कहना है कि सामाजिक कल्याण योजनाओं और विकास परियोजनाओं को जारी रखने के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन किया जा रहा है।
केरल की वित्तीय स्थिति को लेकर जारी यह बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है, क्योंकि राज्य में बढ़ते कर्ज, राजस्व संग्रह और सरकारी खर्चों का मुद्दा राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
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