एच-1बी वीजा प्रतिबंधों के खिलाफ अमेरिकी संसद में विधेयक, ट्रंप के फैसले को चुनौती
वॉशिंगटन (आरएनआई)। अमेरिका में एच-1बी वीजा पर लगाए गए कड़े नियमों को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सांसद Bonnie Watson Coleman ने एक नया विधेयक पेश किया है, जो पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लागू किए गए सख्त वेतन और शुल्क संबंधी नियमों को खत्म करने की मांग करता है। इस कदम को एच-1बी वीजा कार्यक्रम को राहत देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।
सांसद कोलमैन ने कहा कि ट्रंप प्रशासन का यह फैसला “अल्पदृष्टि वाली घोषणा” थी, जिसने अमेरिकी नियोक्ताओं, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों के सामने अनावश्यक बाधाएं खड़ी कर दी हैं। उनके अनुसार ये संस्थान उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों पर काफी हद तक निर्भर करते हैं और कड़े नियमों के कारण जरूरी प्रतिभा को आकर्षित करना कठिन हो गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि H-1B Visa Program कभी भी अमेरिकी श्रमिकों का विकल्प नहीं रहा, बल्कि यह अमेरिका और वैश्विक प्रतिभा के बीच एक सेतु का काम करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उन विशेषज्ञों की भर्ती संभव होती है, जिनकी देश में कमी होती है।
कोलमैन ने खास तौर पर स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर चिंता जताई। उनका कहना है कि उम्रदराज कार्यबल, कोविड-19 के प्रभाव और नीतिगत पाबंदियों के कारण अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं पर पहले ही दबाव है। ऐसे समय में एच-1बी वीजा पर प्रतिबंध लगाने से आने वाले वर्षों में नर्सों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों की गंभीर कमी पैदा हो सकती है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि “वेलकमिंग इंटरनेशनल सक्सेस एक्ट” नाम का यह विधेयक योग्य स्वास्थ्य पेशेवरों और अन्य कुशल विदेशी विशेषज्ञों की बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करेगा। इस प्रस्ताव को कई डेमोक्रेटिक सांसदों का समर्थन भी मिल रहा है, जिनमें Yvette D. Clarke, Lois Frankel, Seth Moulton और Hank Johnson जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
गौरतलब है कि एच-1बी वीजा धारकों में भारतीय पेशेवरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक मानी जाती है, खासकर तकनीकी क्षेत्र में। यही कारण है कि इस कार्यक्रम से जुड़े फैसलों पर India और United States दोनों देशों में बसे भारतीय समुदाय की नजर रहती है। ट्रंप प्रशासन की सख्त नीतियों के बाद भारतीय पेशेवरों और उनसे जुड़ी कंपनियों के बीच चिंता भी बढ़ गई थी।
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