ईरान (आरएनआई) ईरान के गहराई में छिपे संवर्धित यूरेनियम भंडार पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस विकल्प पर विचार कर रहे हैं, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिशन बेहद जटिल, लंबा और अत्यधिक जोखिम भरा हो सकता है, जिसे केवल हवाई हमलों के जरिए अंजाम देना संभव नहीं होगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस तरह के अभियान में बहु-चरणीय सैन्य रणनीति अपनानी पड़ेगी, जिसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती भी शामिल होगी। पूर्व अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के उद्देश्य से इस प्रकार की कार्रवाई करना आसान नहीं है और इसे अंजाम देना इतिहास के सबसे कठिन विशेष अभियानों में गिना जा सकता है।
विशेषज्ञ मिक मुलरॉय के अनुसार, इस तरह का ऑपरेशन केवल बमबारी तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसके लिए जमीनी स्तर पर पहुंच बनानी होगी। वहीं, विशेषज्ञ जोनाथन रुहे का मानना है कि कार्रवाई के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह तय करना होगी कि यूरेनियम को मौके पर ही निष्क्रिय किया जाए या उसे बाहर ले जाकर सुरक्षित तरीके से नष्ट किया जाए। दोनों ही विकल्पों में गंभीर जोखिम शामिल हैं।
मिशन की सबसे बड़ी चुनौती यूरेनियम भंडार की सटीक लोकेशन को लेकर अनिश्चितता है। पूर्व रक्षा अधिकारी जेसन कैंपबेल के अनुसार, यदि यह सामग्री कई स्थानों पर फैली हुई है, तो अभियान और भी जटिल हो जाएगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रमुख राफेल ग्रोसी के मुताबिक, अधिकांश उच्च संवर्धित यूरेनियम इस्फहान में मौजूद है, जबकि कुछ नतांज में भी रखा गया है। हालांकि हालिया सैन्य गतिविधियों के बाद निरीक्षकों की अनुपस्थिति के कारण सटीक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इसके अलावा, लॉजिस्टिक और युद्धक्षेत्र की चुनौतियां भी इस मिशन को कठिन बनाती हैं। उपग्रह तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इस्फहान जैसे ठिकानों के सुरंग मार्गों को मिट्टी से बंद कर दिया गया है, जिससे वहां तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। ऐसे में अमेरिकी सैनिकों को भारी मशीनरी के साथ खुदाई करनी पड़ सकती है। ईरान के भीतर करीब 300 मील अंदर स्थित इन ठिकानों तक पहुंचना, आपूर्ति बनाए रखना और घायल सैनिकों की सुरक्षित निकासी करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह का कोई भी सैन्य अभियान न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े प्रभाव डाल सकता है, इसलिए इससे जुड़े हर कदम को बेहद सावधानी और रणनीतिक समझ के साथ उठाने की आवश्यकता है।
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