विजयदशमी विशेष: भारत सरकार ने 1974 में जारी किया था रावण के चित्र वाला डाक टिकट
हाथरस। विजयदशमी पर जहां देशभर में रावण के पुतले का दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, वहीं भारतीय डाक विभाग ने वर्ष 1974 में रावण के चित्र वाला डाक टिकट भी जारी किया था। उत्तर प्रदेश के हाथरस में डाक टिकट संग्रहकर्ता शैलेंद्र वार्ष्णेय सर्राफ के पास यह दुर्लभ टिकट आज भी सुरक्षित है।
भारतीय डाक विभाग के अभिलेखों के अनुसार, यह टिकट 15 अप्रैल 1974 को ‘इंडियन मास्क्स’ यानी भारतीय मुखौटों की श्रृंखला के तहत जारी किया गया था। दो रुपये मूल्य वाले इस टिकट पर रावण के मुखौटे का चित्र था। इसी दिन सूर्य, चंद्रमा और भगवान नरसिंह के मुखौटों वाले टिकट भी जारी किए गए थे। इनकी कीमत क्रमशः 20 पैसे, 50 पैसे और एक रुपये थी।
शैलेंद्र वार्ष्णेय के संग्रह में मौजूद यह टिकट डाक टिकटों के इतिहास और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं में रुचि रखने वालों के लिए खास महत्व रखता है। रावण को रामायण में एक ओर अहंकार और अधर्म के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, वहीं दूसरी ओर उसे विद्वान और शास्त्रों का जानकार भी बताया गया है।
रावण के चित्र वाला यह टिकट भारतीय डाक विभाग की उस श्रृंखला का हिस्सा था, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक और पारंपरिक मुखौटों को स्थान दिया गया था। ऐसे दुर्लभ टिकट न केवल डाक इतिहास को सहेजते हैं, बल्कि बीते समय की कला और सांस्कृतिक विरासत की झलक भी प्रस्तुत करते हैं।
विजयदशमी के अवसर पर सामने आया यह ऐतिहासिक टिकट हाथरस के संग्रहकर्ता के माध्यम से एक बार फिर चर्चा में है और डाक टिकट संग्रह की दुनिया में इसकी विशेष पहचान बनी हुई है।
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