एमपी में 2 से ज्यादा संतान का नियम अभी बरकरार, सरकारी नौकरी पर संकट; कैबिनेट में नहीं पहुंचा प्रस्ताव

Sunday, August 9, 2026 - 17:11
Updated: 18 hours ago
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एमपी में 2 से ज्यादा संतान का नियम अभी बरकरार, सरकारी नौकरी पर संकट; कैबिनेट में नहीं पहुंचा प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी से रोक लगाने वाले करीब 25 साल पुराने प्रावधान को खत्म करने का मामला एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बावजूद इस नियम को हटाने से जुड़ा प्रस्ताव अभी तक कैबिनेट तक नहीं पहुंच पाया है। हालांकि सरकार की ओर से नियम में बदलाव की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

 

जानकारी के मुताबिक, दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी के लिए अपात्र करने वाला प्रावधान लंबे समय से कर्मचारी संगठनों के विरोध का विषय रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यह नियम मौजूदा परिस्थितियों में कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है। इसी को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे हटाने की बात कही थी।

 

मंत्रालय सूत्रों के अनुसार, पूर्व मुख्य सचिव अनुराग जैन के कार्यकाल के दौरान वरिष्ठ सचिव समिति की बैठक में भी इस नियम को खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई थी। हालांकि समिति के सदस्यों की सहमति नहीं बनने के कारण प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका और मामला कैबिनेट तक नहीं पहुंच पाया।

 

करीब एक महीने पहले मुख्यमंत्री यादव ने एक बार फिर अधिकारियों को इस नियम में बदलाव के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई नया नियम या अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है।

 

इसी बीच सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की ओर से प्रस्तावित नए नियम के ड्राफ्ट पर भी मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई थी। 6 जून 2026 को प्रकाशित ड्राफ्ट में दो से अधिक संतान की पाबंदी को बरकरार रखा गया था। ड्राफ्ट के नियम 5 और 6 में सरकारी नौकरी के लिए पात्रता और अपात्रता की शर्तें निर्धारित की गई थीं।

 

प्रस्ताव के अनुसार, ऐसा उम्मीदवार जिसके दो से अधिक बच्चे हैं और जिनमें से किसी एक का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है, वह सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि जुड़वां बच्चों से जुड़े मामलों में राहत का प्रावधान रखा गया है। यदि किसी व्यक्ति का एक बच्चा है और अगली डिलीवरी में जुड़वां या उससे अधिक बच्चे पैदा होते हैं, तो उसे इस आधार पर अपात्र नहीं माना जाएगा।

 

मुख्यमंत्री ने इस प्रावधान को हटाने के निर्देश देते हुए GAD से ड्राफ्ट को पोर्टल से हटाकर संशोधित प्रारूप दोबारा प्रकाशित करने को कहा था। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस पुराने नियम को खत्म करने के लिए अंतिम फैसला कब लेती है।

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