लापरवाही के मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल में स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की सर्जरी
शहर के बीचोंबीच स्थित वर्धमान मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल सवालों के घेरे में है। इस निजी अस्पताल की सबसे खास बात है सरकारी चिकित्सकों द्वारा इलाज, लेकिन एक सरकारी डॉक्टर के इलाज के बाद हुई महिला की मौत ने अस्पताल के ऊपर प्रशासन की नजरें टेढ़ी कर दी हैं।
निजी अस्पताल में ऑपरेशन करने पहुंचे सरकारी डॉक्टर रामकुमार रघुवंशी पर आरोप है कि उनकी लापरवाही के कारण एक महिला की जान चली गई। मनीषा नाम की महिला को इलाज के लिए वर्धमान मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल में भर्ती कराया गया था .शुरू में कहा गया कि पेट में संक्रमण है छोटे से ऑपरेशन के बाद सब ठीक हो जाएगा, परिजन ऑपरेशन के लिए राजी हो गए । सरकारी डॉक्टर रामकुमार रघुवंशी की निगरानी में ऑपरेशन किया गया लेकिन जब परिस्थितियां बिगड़ गई तो महिला को गंभीर हालत में भोपाल रेफर कर दिया गया। नाजुक हालातों में भोपाल पहुंचते ही महिला ने दम तोड़ दिया। आरोप यह भी है कि आयुष्मान कार्ड की पात्रता रखने वाले महिला के परिजनों से अस्पताल प्रबंधन ने 20 हजार रुपए भी ले लिए। महिला की मौत के बाद उसके परिजन निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं जो जरूरी भी है❗
जांच अस्पताल की भी होनी चाहिए कि आखिर किस आधार पर शहर के बीचोंबीच संचालन की अनुमति दी गई। प्रशिक्षित डॉक्टर्स की डिग्री,प्रशिक्षित स्टाफ,आयुष्मान योजना से लाभ ,पैथोलॉजी लैब से लेकर अस्पताल के Bio Medical Waste निष्पादन की भी जांच जरूरी है।
मप्र के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला भले ही प्रदेश की अस्वस्थ होती स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंतित हैं.निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर्स की प्रैक्टिस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं । लेकिन स्वास्थ्य मंत्री की चिंता से क्या चिकित्सकों को कोई फर्क पड़ा ?? ये सवाल चिरस्थाई है.जिसमें नामी ग्रामी सरकारी डॉक्टर डूबे हुए हैं । सरकारी सेवाओं के साथ साथ निजी अस्पताल में प्रैक्टिस दोनों हाथों में लड्डू और सिर कढ़ाई में डूबने की तरह है।
ऐसा नहीं है कि रामकुमार रघुवंशी अकेले सरकारी डॉक्टर हैं जो निजी अस्पताल में सेवाएं दे रहे हैं बल्कि ऐसे डॉक्टर्स की लंबी सूची है जो निजी अस्पतालों में पार्टनरशिप भी रखते हैं ।
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