सुप्रीम कोर्ट सख्त: दिल्ली पुलिस शैक्षणिक संस्थानों के आसपास बढ़ाए गश्त, यौन अपराध रोकने के लिए दिए निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ सामने आए यौन अपराधों के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने दिल्ली पुलिस को स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और कोचिंग संस्थानों के आसपास पुलिस गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि अपराधों की रोकथाम के लिए सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उसका असर जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बसों, टैक्सियों, ऑटो और ऐप आधारित कैब सेवाओं से जुड़े चालकों तथा सहायकों का सख्त सत्यापन करने का निर्देश दिया है। अदालत के अनुसार, केवल पंजीकृत और सत्यापित व्यक्तियों को ही इन वाहनों के संचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सत्यापित चालकों तथा सहायकों के नाम और तस्वीरें भी वाहन में ऐसी जगह प्रदर्शित करने को कहा गया है, जहां से उन्हें आसानी से देखा जा सके।
अदालत ने दिल्ली के संवेदनशील इलाकों की पहचान करने, नियमित गश्त बढ़ाने और सार्वजनिक स्थानों पर रोशनी तथा सीसीटीवी व्यवस्था की जांच करने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही पुलिस गश्त और निगरानी व्यवस्था की प्रभावी निगरानी के लिए समर्पित नियंत्रण कक्ष या ‘वॉर रूम’ की उपलब्धता और कार्यप्रणाली पर रिपोर्ट मांगी गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अपराधों की रोकथाम के लिए पुलिस की मौजूदगी और त्वरित कार्रवाई जरूरी है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई हो। अदालत ने पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही और नागरिकों के भरोसे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
ये निर्देश दिल्ली-एनसीआर में हाल के यौन अपराधों से संबंधित मामलों पर स्वतः संज्ञान लेकर की जा रही सुनवाई के दौरान दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।
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