नेपाल बाढ़ त्रासदी में 547 मौतें, 977 लोग लापता; भोटेकोशी में फिर बाढ़ की चेतावनी से बढ़ी चिंता
नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, बाढ़ से अब तक 547 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 977 लोग अभी भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान 1,545 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है। इनमें 84 लोगों का इलाज काठमांडू के अस्पतालों में चल रहा है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में भोटेकोशी नदी का जलस्तर और कीचड़ बढ़ने के कारण एक बार फिर बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों के साथ-साथ राहत और बचाव दलों को भी सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी है।
बाढ़ में जान गंवाने वालों के शव नदी के तेज बहाव में कई किलोमीटर दूर तक पहुंच रहे हैं। रसुवा और नुवाकोट से बहकर आए शव चितवन, तनहुं, नवलपरासी, गोरखा समेत कई जिलों में बरामद हुए हैं। बड़ी संख्या में शव मिलने के कारण कई स्थानों पर मुर्दाघरों में जगह की कमी हो गई है और अधिकारियों को शवों को सुरक्षित रखने तथा उनकी पहचान के लिए अस्थायी व्यवस्था करनी पड़ रही है।
भारत के कई राज्यों के लोग भी प्रभावित
नेपाल में आई इस त्रासदी में भारत के कई राज्यों के नागरिकों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों के लापता लोगों की तलाश जारी है। भारतीय वायुसेना राहत और बचाव अभियान में मदद कर रही है। वहीं बिहार और उत्तर प्रदेश से सटे नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सिक्किम सरकार ने भी नेपाल में फंसे या लापता राज्य के लोगों की मदद के लिए टास्क फोर्स बनाई है। यह टीम केंद्र सरकार, नेपाल स्थित भारतीय दूतावास और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय कर प्रभावित लोगों की जानकारी जुटाने और जरूरी सहायता पहुंचाने का काम करेगी।
चीन में भी आपदा की स्थिति की समीक्षा
उधर, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई भीषण बाढ़ से पैदा हुई स्थिति की समीक्षा के लिए सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक की शुरुआत बाढ़ में मारे गए लोगों की याद में मौन रखकर हुई। दोनों देशों की सीमा से लगे क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
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