चीनी के बढ़ते दाम पर सरकार सख्त, 10 टीमें करेंगी स्टॉक की जांच; यूपी समेत कई राज्यों में 400 टन की सीमा
त्योहारों से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी पर केंद्र सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में थोक डीलरों के लिए चीनी के स्टॉक की सीमा तय की गई है। इसके साथ ही अलग-अलग राज्यों में स्टॉक की स्थिति जांचने के लिए केंद्र की 10 टीमें भेजी जाएंगी।
सरकार के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब समेत कई राज्यों में थोक चीनी डीलर अब 400 टन से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेंगे। यह व्यवस्था 30 नवंबर तक लागू रहेगी। खरीदी गई चीनी को निर्धारित अवधि से अधिक समय तक गोदाम में रोककर रखने पर भी कार्रवाई की जाएगी।
चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेजी देखने को मिली है। 20 जुलाई को चीनी का औसत भाव करीब 48.18 रुपये प्रति किलो था, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो पहुंच गया। वहीं, कुछ शहरों में खुदरा बाजार में चीनी 70 से 80 रुपये प्रति किलो तक बिकने की जानकारी सामने आई है।
बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें चीनी मिलों, गोदामों और थोक कारोबारियों के स्टॉक की जांच कर रही हैं। राज्यों को औचक निरीक्षण करने और स्टॉक में गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चीनी की उपलब्धता और आपूर्ति को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। सरकार ने साफ किया है कि प्रदेश में चीनी की कमी नहीं है और जमाखोरी या कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद बागपत समेत कई जिलों में गोदामों की जांच शुरू की गई है। बरेली और नोएडा में भी अधिकारियों ने स्टॉक की स्थिति की समीक्षा की।
कारोबारियों को अब चीनी के स्टॉक का पूरा ब्योरा खाद्य विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करना होगा। हर शुक्रवार को स्टॉक की जानकारी अपडेट करनी होगी। अगर गोदाम में मौजूद स्टॉक और पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों में अंतर पाया जाता है तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य त्योहारों के दौरान कृत्रिम कमी और कालाबाजारी पर रोक लगाकर बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है।
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