मानसून सत्र खत्म होने में देरी पर कांग्रेस का सवाल, जयराम रमेश बोले- ‘किस तैयारी में जुटी सरकार?’
संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने के बावजूद अब तक औपचारिक सत्रावसान नहीं होने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस देरी को असामान्य बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।
लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थी। जयराम रमेश ने कहा कि सामान्य तौर पर सदन के अनिश्चितकालीन स्थगन और सत्रावसान के बीच कुछ दिनों का अंतर रहता है। कई मौकों पर दोनों प्रक्रियाएं एक ही दिन भी पूरी हुई हैं।
रमेश के मुताबिक लोकसभा को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए 10 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सत्रावसान की कोई जानकारी सामने नहीं आई है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस असामान्य देरी की वजह क्या है।
‘क्या विशेष सत्र की तैयारी चल रही है?’
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सवाल किया कि क्या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अब भी परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को विशेष सत्र में पारित कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने मौजूदा देरी को लेकर सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि 2015 के मानसून सत्र में स्थगन और सत्रावसान के बीच 28 दिन तथा 2021 में 20 दिन का अंतर रहा था। हालांकि, उनके मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में देरी को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि सरकार की ओर से कोई स्पष्ट वजह सामने नहीं आई है।
सत्रावसान की प्रक्रिया का नियम भी बताया
जयराम रमेश ने संसद की कार्यवाही से जुड़ी पुस्तक ‘प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर ऑफ पार्लियामेंट’ के एमएन कौल और एसएल शकधर द्वारा लिखे गए हिस्से का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 85(2) के तहत राष्ट्रपति के आदेश से सदन का सत्र औपचारिक रूप से समाप्त किया जाता है और इस संबंध में राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर कार्य करते हैं।
कांग्रेस का कहना है कि मानसून सत्र के स्थगन के बाद सत्रावसान में हो रही देरी के पीछे सरकार की क्या रणनीति है, इसे स्पष्ट किया जाना चाहिए।
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