मथुरा बिजली विभाग में कनेक्शन के नाम पर कथित भ्रष्टाचार के आरोप, एंटी करप्शन टीम की रडार पर अधिकारी
भानु प्रकाश शर्मा
मथुरा। जनपद मथुरा के विद्युत विभाग में नए बिजली संयोजन के नाम पर कथित रूप से अवैध वसूली और आम उपभोक्ताओं को परेशान किए जाने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। सूत्रों के हवाले से खबर है की विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारी एवं कर्मचारी नए विद्युत संयोजन के लिए आवेदन करने वाले उपभोक्ताओं को प्रकार की परेशानियां और तकनीकी कारणों का हवाला देकर परेशान करते हैं।
कई बार तो कंप्यूटर सर्वर डाउन अथवा अन्य तकनीकी समस्या दिखाकर उपभोक्ताओं को बताया जाता है की उनका कनेक्शन संभव नहीं है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार इसके बाद कथित रूप से बिचौलियों या संबंधित लोगों के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि सुविधा शुल्क या सेवा की जाए तो कनेक्शन कर दिया जाएगा
सूत्र बताते हैं। का यह भी आरोप है कि कुछ मामलों में उपभोक्ताओं को रात के समय फोन कर कथित रूप से संपर्क किया जाता है और कहा जाता है कि सुविधा शुल्क या अन्य व्यवस्था करने पर काम हो जाएगा, अन्यथा बिजली संयोजन संभव नहीं होगा।
मामले में यह भी आरोप लगाए गए हैं कि बड़ी संख्या में आवेदन विभिन्न आपत्तियां लगाकर निरस्त कर दिए जाते हैं, जिसके बाद उपभोक्ताओं को दोबारा नए आवेदन नंबर और शपथ पत्र सहित अन्य दस्तावेज जमा करने पड़ते हैं। बार-बार आवेदन निरस्त होने और विभागीय प्रक्रिया में फंसने के बाद कई उपभोक्ता को मजबूरी में अवैध धनराशि देने को तैयार हो जाते हैं।
कि जिन उपभोक्ताओं से भ्रष्टाचार द्वारा मोटी रकम ली जाती है, उनके बिजली संयोजन में आने वाली बाधाएं आसानी से दूर हो जाती हैं। वहीं आम उपभोक्ता कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हो रहा है।
मामले में हाईकोर्ट, जिला जज और सीजेएम न्यायालय के आदेशों की अनदेखी किए जाने के आरोप हैं। कि यदि न्यायालयों के आदेशों के बावजूद आम जनता को न्याय और नियमानुसार विद्युत संयोजन कनेक्शन नहीं मिल रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
बताया गया है कि इस संबंध में मुख्य अभियंता एवं अधिशासी अभियंता सहित संबंधित उच्च अधिकारियों को शिकायत और सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं होती है तो मामला उच्च स्तर तक पहुंच सकता है।
अब सवाल यह है कि आखिर मथुरा जनपद में बिजली संयोजन के नाम पर आम उपभोक्ताओं कब तक होगा शोषण व परेशान किया जाएगा? क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराएंगे, या फिर भ्रष्टाचार के आरोपों पर कार्रवाई का इंतजार किया जाएगा?
सूत्रों और शिकायतकर्ताओं का दावा है कि मामले से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका से संबंधित दस्तावेज एवं साक्ष्य उचित मंच पर प्रस्तुत किए जा सकते हैं। यदि जांच होती है तो कई बड़े नाम सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अब देखना यह होगा कि एंटी करप्शन टीम और विद्युत विभाग के उच्च अधिकारी इन गंभीर आरोपों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
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