IAS अवॉर्ड दिलाने के लिए पहले ही लिख दिया था बरी का फैसला? हाईकोर्ट ने जज पर विभागीय कार्रवाई रद्द करने से किया इनकार

Monday, July 13, 2026 - 17:26
Updated: 3 months ago
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IAS अवॉर्ड दिलाने के लिए पहले ही लिख दिया था बरी का फैसला? हाईकोर्ट ने जज पर विभागीय कार्रवाई रद्द करने से किया इनकार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बी.पी. शर्मा की डिवीजन बेंच ने आरोपी सिविल जज के खिलाफ चल रही विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई को रद्द करने से इनकार कर दिया।

मामले में आरोप है कि संबंधित न्यायिक अधिकारी ने अक्टूबर 2020 में ही एक आपराधिक मामले में आरोपी संतोष वर्मा को बरी करने का फैसला तैयार कर लिया था, जबकि ट्रायल अभी जारी था। आरोप यह भी है कि यह कदम आरोपी को अनुचित लाभ पहुंचाने की साजिश के तहत उठाया गया, क्योंकि लंबित आपराधिक मामले के कारण उसका IAS अवार्ड रुका हुआ था।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विभागीय कार्यवाही में देरी हुई है और समान तथ्यों पर आपराधिक मुकदमे के लंबित रहने के दौरान विभागीय जांच जारी रखने से उन्हें नुकसान होगा। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी न्यायिक अधिकारी की ईमानदारी, निष्पक्षता और आचरण की जांच करना अनुशासनात्मक प्राधिकरण का दायित्व है। केवल देरी के आधार पर विभागीय कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती, जब तक यह साबित न हो कि उससे वास्तविक पूर्वाग्रह (Prejudice) हुआ है। साथ ही, अदालत ने कहा कि विभागीय जांच को केवल इसलिए अनिश्चितकाल तक नहीं रोका जा सकता क्योंकि आपराधिक मुकदमा लंबित है।

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