CM फडणवीस का बड़ा एलान: नौकरी और पढ़ाई में मुस्लिम समुदाय को अब 5% कोटा नहीं; देर रात जारी हुआ सरकारी आदेश
मुंबई (आरएनआई)। देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने करीब 12 साल पुराने एक विवादित सरकारी आदेश को औपचारिक रूप से निरस्त कर दिया है। मंगलवार देर रात जारी नए सरकारी संकल्प (जीआर) के तहत अब सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में मुस्लिम समुदाय को मिलने वाला 5 प्रतिशत आरक्षण लागू नहीं रहेगा।
सामाजिक न्याय विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जुलाई 2014 में मुस्लिम समुदाय को विशेष पिछड़ा वर्ग-ए (एसबीसी-ए) श्रेणी में शामिल कर दिया गया 5% आरक्षण अब रद्द माना जाएगा। इसका अर्थ यह है कि इस आधार पर न तो शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए और न ही सरकारी या अर्ध-सरकारी नौकरियों में आरक्षण का दावा किया जा सकेगा। साथ ही, इस श्रेणी के अंतर्गत कोई नया जाति या वैधता प्रमाण पत्र भी जारी नहीं होगा।
गौरतलब है कि यह आरक्षण व्यवस्था कानूनी रूप से पहले ही प्रभावहीन हो चुकी थी। 2014 में इस आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर 14 नवंबर 2014 को अदालत ने रोक लगा दी थी। इसके बाद तय समयसीमा के भीतर अध्यादेश को विधानमंडल से पारित नहीं कराया जा सका, जिसके चलते 23 दिसंबर 2014 को यह स्वतः ही समाप्त हो गया था। बाद में इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाया गया, जहां से भी 5% आरक्षण को लेकर राहत नहीं मिली और इसे अमान्य माना गया।
इसके बावजूद, बीते एक दशक से अधिक समय तक इस पुराने सरकारी आदेश को औपचारिक रूप से रद्द नहीं किया गया था। अब फरवरी 2026 में जारी नए जीआर के जरिए सरकार ने इस कानूनी स्थिति को स्पष्ट करते हुए सभी संबंधित आदेशों और सूचनाओं को निरस्त घोषित कर दिया है। सरकार का कहना है कि यह कदम सिर्फ एक लंबित औपचारिकता को पूरा करने के लिए उठाया गया है, क्योंकि व्यवहार में यह आरक्षण पहले से ही लागू नहीं था।
राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे आरक्षण नीति से जुड़े एक संवेदनशील और लंबे समय से विवादित मुद्दे पर सरकार का रुख पूरी तरह साफ हो गया है। अब 2014 के आदेश के आधार पर किसी भी कॉलेज, विश्वविद्यालय या सरकारी भर्ती प्रक्रिया में 5 प्रतिशत मुस्लिम आरक्षण का लाभ नहीं दिया जाएगा।
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