12 हजार करोड़ का एक्सप्रेसवे तीन महीने में ही मरम्मत की नौबत में, NHAI जांच में निर्माण खामियों का खुलासा
करीब 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से बने दिल्ली-देहरादून ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पर सड़क धंसने के मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की जांच में निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और जल निकासी व्यवस्था में गंभीर लापरवाही सामने आई है। मामले में दो अधिकारियों को निलंबित, एक को डिबार और तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पैकेज-2 में एक जुलाई को बारिश के बाद किलोमीटर 55+480 पर सड़क की ढलान धंस गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद NHAI की बागपत इकाई ने जांच शुरू की।
जांच में पता चला कि बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाया गया बैलेंसिंग कलवर्ट स्थायी ड्रेनेज सिस्टम से जोड़ा ही नहीं गया था। साथ ही स्थानीय विरोध के चलते सड़क के नीचे बनी जल निकासी नाली का इस्तेमाल वाहनों की आवाजाही के लिए होता रहा, जिससे पूरी निकासी व्यवस्था प्रभावित हुई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नियमित निरीक्षण, गुणवत्ता परीक्षण, समय पर रिपोर्टिंग और निर्माण एजेंसी से आवश्यक सुधारात्मक कार्य कराने जैसी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं किया गया।
कार्रवाई के तहत इंजीनियरिंग कंसल्टेंसी के टीम लीडर कुलदीप कुमार राजदान और निर्माण कंपनी के परियोजना प्रबंधक नागेंद्र पाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। सहायक राजमार्ग अभियंता आलोक कुमार को डिबार किया गया है, जबकि कंसल्टेंसी परियोजना प्रबंधक अजय कुमार, वरिष्ठ गुणवत्ता अभियंता राजेंद्र कुमार और परियोजना निदेशक नरेंद्र कुमार सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
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