रामलीला मैदान की रैली रोके जाने पर स्वर्ण आंदोलन के समर्थकों में नाराजगी, सरकार पर उठे सवाल
दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित स्वर्ण आंदोलन की रैली को रोके जाने के बाद आंदोलन से जुड़े लोगों और समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद उन्हें अपनी बात रखने के लिए यह मंच मिलने वाला था, लेकिन सरकार द्वारा इसे रोक दिया गया। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का यह एक प्रयास था, जिसे अनुमति नहीं दी गई।

आंदोलन के समर्थकों का आरोप है कि इससे पहले भी कई बड़े आंदोलन राजधानी में हो चुके हैं और लंबे समय तक चले हैं, लेकिन इस बार स्वर्ण समाज से जुड़े लोगों के कार्यक्रम को रोक दिया गया। उनका कहना है कि देश में लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत किसी भी वर्ग को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए।

समर्थकों के अनुसार, यह आंदोलन किसी प्रकार की हिंसा या अव्यवस्था के लिए नहीं था, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाने के लिए था। उनका कहना है कि आंदोलन से जुड़े लोग हमेशा शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखते आए हैं और आगे भी ऐसा ही करेंगे।

आंदोलन से जुड़े लोगों का यह भी कहना है कि आज के समय में सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी बात देश के गांव-देहात तक पहुंच चुकी है। उनका दावा है कि कई जगहों पर लोगों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा हो रही है और समाज के विभिन्न वर्ग इस पर अपनी राय रख रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कई सवाल ऐसे होते हैं जिनका जवाब समय के साथ मिलता है। फिलहाल वे अपने मुद्दों को लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से उठाते रहेंगे और उम्मीद करते हैं कि भविष्य में उन्हें अपनी बात रखने का अवसर मिलेगा।
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