यूपी में एनकाउंटर पर फिर छिड़ी बहस, विपक्ष ने उठाए सवाल; सरकार ने बताया जीरो टॉलरेंस नीति का हिस्सा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पुलिस एनकाउंटर को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। गाजीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश के एनकाउंटर के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि अपराध और माफिया के खिलाफ उसकी "जीरो टॉलरेंस" नीति जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के कार्यकाल में कई चर्चित एनकाउंटर हुए हैं, जिनमें Vikas Dubey, Asad Ahmed और Anil Dujana जैसे नाम शामिल हैं। इन कार्रवाइयों को लेकर समय-समय पर राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से 2024 के बीच हत्या, अपहरण, फिरौती, बलात्कार और चोरी जैसे कई प्रमुख अपराधों में कमी दर्ज की गई है। सरकार इसे अपनी कानून-व्यवस्था की नीति की सफलता के रूप में पेश करती है।
वहीं, विपक्ष का आरोप है कि एनकाउंटर की कार्रवाई को लेकर पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते रहे हैं। कुछ राजनीतिक दलों ने एनकाउंटर में मारे गए आरोपियों के जातीय और धार्मिक आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार से जवाब मांगा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मार्च 2017 से सितंबर 2024 के बीच 207 आरोपी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए, जिनमें विभिन्न जातीय और धार्मिक समुदायों के लोग शामिल थे।
दूसरी ओर, राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कार्रवाई किसी जाति या धर्म के आधार पर नहीं, बल्कि अपराध के स्वरूप और आरोपी के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जाती है। सरकार का दावा है कि अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के कारण प्रदेश में संगठित अपराध और माफिया गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।
गाजीपुर एनकाउंटर को लेकर विवाद जारी है और विपक्ष के साथ-साथ मृतक आरोपी के परिवार ने भी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और चर्चा का विषय बना रह सकता है।
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