यूपी के रजिस्ट्री कार्यालयों में अनिश्चितकालीन हड़ताल, निजीकरण के विरोध में सड़क पर उतरे कातिब-मुंशी
लखनऊ (आरएनआई) उत्तर प्रदेश में रजिस्ट्री व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेशभर के रजिस्ट्री कार्यालयों में अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों, स्टांप वेंडरों और मुंशियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल का मुख्य कारण रजिस्ट्री कार्य को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित किए जाने के प्रस्ताव का विरोध बताया जा रहा है।
मथुरा, छाता और गोवर्धन तहसील समेत कई जिलों के रजिस्ट्री कार्यालयों में कामकाज प्रभावित हुआ है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि सरकार का यह कदम वर्षों से रजिस्ट्री व्यवस्था से जुड़े हजारों लोगों के रोजगार और भविष्य पर सीधा असर डालेगा। उनका आरोप है कि बिना किसी व्यापक चर्चा और सहमति के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
हड़ताल पर बैठे कातिबों, मुंशियों और अधिवक्ताओं का कहना है कि रजिस्ट्री प्रक्रिया को किसी निजी कंपनी को सौंपने का निर्णय तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में सुधार किया जा सकता है, लेकिन इससे जुड़े लोगों के रोजगार को समाप्त कर देने वाला कोई भी फैसला स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस बीच, आम नागरिकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि रजिस्ट्री कार्य प्रभावित होने से संपत्ति की खरीद-बिक्री और अन्य दस्तावेजी प्रक्रियाएं बाधित हो रही हैं। हड़ताली संगठनों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब सभी की नजर प्रदेश सरकार के अगले कदम पर टिकी है। सवाल यह है कि क्या सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर पुनर्विचार करेगी या फिर डिजिटल और ऑनलाइन व्यवस्था को आगे बढ़ाने की अपनी योजना पर कायम रहेगी। फिलहाल रजिस्ट्री कार्यालयों में गतिरोध बना हुआ है और समाधान की कोई तत्काल संभावना नजर नहीं आ रही है।
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