महिला का निजी वीडियो वायरल करने की धमकी गंभीर अपराध: महिलाओं की गरिमा और निजता पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
महिलाओं की गरिमा, निजता और यौन स्वायत्तता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए साफ कहा है कि किसी महिला का निजी वीडियो सार्वजनिक करने या सोशल मीडिया पर अपलोड करने की धमकी देना गंभीर अपराध है। अदालत ने कहा कि महिलाओं के चरित्र और नैतिकता को पुराने पितृसत्तात्मक नजरिए से नहीं देखा जा सकता और संविधान हर महिला को सम्मान और निजता के साथ जीने का अधिकार देता है।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें Sanjay Karol और N. Kotiswar Singh शामिल थे, ने सुनाया। मामला Tamil Nadu से जुड़ा था, जिसमें आरोपी Vijay Kumar पर अपनी पूर्व पार्टनर का नहाते समय वीडियो बनाने और बाद में उसे फेसबुक पर अपलोड करने की धमकी देने का आरोप था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह की धमकी महिला की गरिमा, निजता और उसकी यौन स्वतंत्रता पर सीधा हमला है। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (भाग-2) के तहत आरोपी की दोषसिद्धि को सही ठहराते हुए कहा कि किसी महिला की निजी जिंदगी को हथियार बनाकर उसे डराना या बदनाम करना कानूनन गंभीर अपराध है।
अपने फैसले में अदालत ने यह भी कहा कि “अनैतिकता” और “पवित्रता” जैसे शब्दों को अब पुराने सामाजिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जा सकता। पहले समाज महिलाओं के चरित्र को नैतिकता के कठोर पैमानों से आंकता था, लेकिन आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था महिला को अपनी जिंदगी, निजी पसंद और संबंधों को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार देती है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर व्यक्ति को गरिमा और निजता के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है। अदालत ने कहा कि किसी महिला की निजी तस्वीरों या वीडियो का इस्तेमाल उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, डराने या ब्लैकमेल करने के लिए नहीं किया जा सकता।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला महिलाओं की डिजिटल सुरक्षा, निजता और सम्मान को लेकर एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश है, जो साइबर अपराध और ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में भी अहम प्रभाव डाल सकता है।
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