पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में बोले जयशंकर: तनाव कम करने के लिए संवाद जरूरी
नई दिल्ली (आरएनआई)। संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत सोमवार से हो गई। सत्र के पहले दिन पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण स्थिति को लेकर विदेश मंत्री S. Jaishankar ने राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा और कहा कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी हैं।
विदेश मंत्री ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में नेतृत्व स्तर पर ईरान से संपर्क साधना आसान नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भारत लगातार संवाद बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि ईरान के विदेश मंत्री ने भारत का आभार व्यक्त किया है, क्योंकि भारत ने मानवीय आधार पर ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को Cochin Port पर डॉक करने की अनुमति दी थी। भारत की ओर से जहाज को तकनीकी सहायता और सुरक्षित ठहराव की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई, जिसे ईरान ने दोस्ताना संबंधों की मिसाल बताया।
जयशंकर ने राज्यसभा को यह भी बताया कि पश्चिम एशिया में बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए कई एडवाइजरी जारी की हैं। 14 जनवरी को जारी चेतावनी में भारतीय नागरिकों से उस क्षेत्र की यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी गई थी। इसी दिन मुंबई स्थित डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने भी भारतीय समुद्री कर्मियों के लिए चेतावनी जारी करते हुए उन्हें दूतावास की सलाह का पालन करने और अनावश्यक समुद्री गतिविधियों से दूर रहने को कहा था। साथ ही भर्ती और शिपिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया कि वे भारतीय समुद्री कर्मियों को ईरान भेजने या वहां नियुक्त न करें।
उन्होंने बताया कि हालात का आकलन करते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 14 फरवरी को एक और सलाह जारी की, जिसमें भारतीय नागरिकों, छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों से सभी उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने को कहा गया। इसके लिए 24 घंटे सहायता सेवा भी उपलब्ध कराई गई। 23 फरवरी को इस सलाह को और सख्त शब्दों में दोहराया गया।
विदेश मंत्री के अनुसार कई भारतीय नागरिक इन चेतावनियों का पालन करते हुए सुरक्षित लौट चुके हैं, हालांकि अभी भी कुछ लोग ईरान और इराक में मौजूद हैं। सरकार लगातार उनके संपर्क में है और उन्हें सुरक्षित वापस लाने के लिए प्रयास जारी हैं। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 67 हजार भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय सीमाएं पार कर सुरक्षित लौट चुके हैं।
जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया की स्थिति गंभीर है और सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इस संघर्ष के कारण क्षेत्र के कई देशों में सामान्य जीवन और आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और कुछ स्थानों पर हालात पूरी तरह ठप हो गए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीतिक समाधान ही सबसे प्रभावी रास्ता है।
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