कौन हैं कांग्रेस के सबसे ताकतवर मुस्लिम नेता रकीबुल हुसैन, जिनके चलते भूपेन बोरा ने छोड़ी पार्टी
गुवाहाटी (आरएनआई)। असम की राजनीति में बड़ा उलटफेर उस समय देखने को मिला, जब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेन बोरा ने पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने न सिर्फ कांग्रेस संगठन में हलचल मचा दी, बल्कि पार्टी के अंदरूनी शक्ति संतुलन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए। भूपेन बोरा के कांग्रेस छोड़ने की मुख्य वजह के तौर पर कांग्रेस सांसद रकीबुल हुसैन का नाम सामने आ रहा है।
इस्तीफे के बाद भूपेन बोरा ने खुलकर आरोप लगाया कि असम कांग्रेस की वास्तविक कमान रकीबुल हुसैन के हाथ में है, जबकि प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई केवल नाममात्र की भूमिका में रह गए हैं। बोरा का कहना है कि पार्टी के अहम फैसले एक ही नेता के इर्द-गिर्द सिमटकर रह गए, जिससे संगठनात्मक लोकतंत्र कमजोर हुआ और कई वरिष्ठ नेताओं को हाशिये पर धकेल दिया गया।
रकीबुल हुसैन वर्तमान में धुबरी लोकसभा सीट से सांसद हैं और उन्हें असम कांग्रेस का सबसे प्रभावशाली मुस्लिम नेता माना जाता है। वे लंबे समय तक असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के बेहद करीबी रहे हैं। तरुण गोगोई के कार्यकाल में रकीबुल हुसैन को मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली थी, जिसके दौरान उन्होंने संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, तरुण गोगोई युग में तैयार हुई कांग्रेस की रणनीतिक संरचना में रकीबुल हुसैन की भूमिका बेहद अहम रही है। अल्पसंख्यक वोट बैंक, खासकर निचले असम में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है, जिससे पार्टी के भीतर उनका कद लगातार बढ़ता गया। यही वजह है कि उन्हें असम कांग्रेस के “पावर सेंटर” के रूप में देखा जाता है।
भूपेन बोरा का इस्तीफा इस बात का संकेत माना जा रहा है कि असम कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और प्रभाव को लेकर गहरी खाई बन चुकी है। चुनाव से पहले यह घटनाक्रम पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि रकीबुल हुसैन की बढ़ती राजनीतिक ताकत एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है।
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