कमिश्नर के फर्जी आदेशों से आदिवासी भूमि घोटाला उजागर: FIR के बाद भी पुलिस हाथ-पर-हाथ धरे बैठी

Tuesday, November 18, 2025 - 21:01
Updated: 11 months ago
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कमिश्नर के फर्जी आदेशों से आदिवासी भूमि घोटाला उजागर: FIR के बाद भी पुलिस हाथ-पर-हाथ धरे बैठी

शिवपुरी (आरएनआई) जिले में विक्रय से वर्जित भूमि को वैध बताने के लिए कमिश्नर के नाम पर फर्जी आदेश, सील और स्टाम्प तैयार करने वाले शातिर गैंग का मामला अब बड़ा घोटाला बनता जा रहा है। मामले में FIR दर्ज हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन कोतवाली पुलिस की जांच अब तक रफ्तार नहीं पकड़ सकी है। न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न ही ठोस पूछताछ शुरू हुई, जिसके चलते साक्ष्यों के नष्ट होने का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, ठग गैंग ने योजनाबद्ध तरीके से कमिश्नरी की नकली मुहर, दस्तावेज़ और अनुमति पत्र तैयार कर कई जमीनों के सौदे कराए। कई एग्रीमेंट हुए यह जमीनें सहरिया समुदाय सहित उन श्रेणियों में आती हैं जिन्हें कानूनन बेचा नहीं जा सकता। इसके बावजूद फर्जी अनुमति आदेश के दम पर लाखों-करोड़ों का खेल रचा गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन खरीदारों ने ये जमीनें खरीदीं, उनकी भूमिका भी संदेह के दायरे में है। जांच सूत्रों का कहना है कि फर्जी कागजों के साथ जमीन खरीदना केवल ठगी नहीं बल्कि मिलीभगत का भी संकेत देता है। कई खरीदारों को यह जानकारी थी कि दस्तावेज़ संदिग्ध हैं, फिर भी सौदा किया गया।

सहरिया  क्रांति संयोजक संजय बेचैन  ने आरोप लगाया है कि यदि पुलिस ने समय रहते आरोपियों को नहीं पकड़ा तो गैंग के पास मौजूद डिजिटल-फिजिकल साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं, जिससे मामले की जड़ तक पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ एक ठगी नहीं बल्कि जिले में आदिवासी जमीनों की सुरक्षा पर सीधा हमला है, और यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कोतवाली पुलिस आखिर कब तक इस मामले को गंभीरता से लेती है और कब पहली गिरफ्तारी होती है।

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