'हाउस अरेस्ट’ से नहीं रुकी आवाज: एडवोकेट अंजलि सैनी का संघर्ष बना प्रेरणा
उत्तर प्रदेश के मथुरा से जुड़ीं अंजलि सैनी आज उन युवा चेहरों में शामिल हैं, जो सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के मुद्दों पर बेखौफ आवाज उठा रही हैं। मजबूत इरादों और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उन्होंने न सिर्फ वकालत के पेशे को अपनाया, बल्कि उसे समाज के वंचित और शोषित वर्गों की लड़ाई का माध्यम भी बनाया।
कानून की पढ़ाई पूरी करने के बाद अंजलि सैनी ने सामाजिक सरोकारों को अपनी प्राथमिकता बनाया। वे राष्ट्रीय फुले संघ की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और “मेरी आवाज” संस्था की संस्थापक के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनके विचार महात्मा ज्योतिबा फुले और सावित्रीबाई फुले की शिक्षाओं से प्रेरित हैं, जिनमें शिक्षा, जातिवाद विरोध, महिला अधिकार और सामाजिक समानता प्रमुख हैं।
अंजलि सैनी का संघर्ष खासतौर पर पिछड़े, दलित और शोषित वर्गों के अधिकारों के लिए रहा है। वे महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामलों में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी होती हैं और न्याय दिलाने के लिए सक्रिय रहती हैं। कई संवेदनशील मामलों में उनकी सक्रियता के चलते प्रशासन द्वारा उन्हें ‘हाउस अरेस्ट’ तक किया गया, लेकिन उन्होंने अपने कदम पीछे नहीं खींचे।
सोशल मीडिया पर भी वे बिना किसी हिचक के अन्याय और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ मुखर रहती हैं। “अब नहीं चलेगा प्रधान पति” जैसे उनके बयान सामाजिक बहस का हिस्सा बने हैं। वे युवाओं और महिलाओं को शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार मानने की प्रेरणा देती हैं और “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” का संदेश फैलाती हैं।
विभिन्न राज्यों में आयोजित कार्यक्रमों के जरिए वे फुले विचारधारा और सम्राट अशोक के आदर्शों का प्रचार-प्रसार करती रही हैं। कठिन परिस्थितियों, सामाजिक दबाव और प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद उनका संघर्ष लगातार जारी है।
अंजलि सैनी की कहानी यह दिखाती है कि प्रतिबद्धता, साहस और शिक्षा के बल पर एक व्यक्ति समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। उनका सफर न केवल व्यक्तिगत संघर्ष की कहानी है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की एक मजबूत पहल भी है।
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