'सिर्फ गिरफ्तारी काफी नहीं': अंडा फेंकने की घटनाओं पर कलकत्ता हाईकोर्ट सख्त, पुलिस से दो सप्ताह में मांगी रिपोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं पर अंडे फेंके जाने की घटनाओं को लेकर राज्य पुलिस से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अदालत ने कहा कि केवल आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है।
मामले की सुनवाई एक्टिंग चीफ जस्टिस तापब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी चटर्जी की खंडपीठ ने तृणमूल कांग्रेस की जनहित याचिका पर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुलिस की मौजूदगी में तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और जनप्रतिनिधियों पर अंडे फेंके, जबकि पुलिस मूकदर्शक बनी रही।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना और सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में अंतरिम आदेश जारी करने की याचिकाकर्ता की मांग स्वीकार नहीं की।
राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि प्रशासन लगातार लोगों से कानून अपने हाथ में न लेने की अपील कर रहा है, लेकिन कई मामलों में औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं होने के कारण कार्रवाई सीमित रही है।
वहीं, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद कल्याण बनर्जी ने अदालत में आरोप लगाया कि पुलिस ऐसी घटनाओं को रोकने में विफल रही है। उन्होंने दावा किया कि अंडे फेंकने की घटनाएं हवाई अड्डों जैसे सुरक्षित स्थानों पर भी हुईं और इन घटनाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने मामले में राज्य पुलिस को दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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