सियासत में फिर उलटी पड़ी चाल,सांसद हुए बेहाल कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम लीज बनी सियासी संग्राम सदन में सिंधिया समर्थित प्रस्ताव को भारी बहुमत, विरोध करने वाले रह गए हाशिए पर
ग्वालियर (आरएनआई) ग्वालियर की राजनीति में एक बार फिर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रभाव की झलक साफ दिखाई दी। कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम की 30 साल की लीज को लेकर नगर निगम परिषद में हुआ फैसला सियासी समीकरणों को उजागर कर गया। सिंधिया का विरोध कर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की कोशिश कर रहे सांसद भारत सिंह कुशवाह को इस मुद्दे पर एक बार फिर मुंह की खानी पड़ी।
?मुख्य बातें:
_ 30 साल की लीज को बहुमत से मंजूरी
— कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम को जीडीसीए को दोबारा लीज पर देने का प्रस्ताव पारित।
_विरोध में सिर्फ 4 पार्षद
— भाजपा के 33 पार्षदों में से सदन में मौजूद 28 में 24 ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
_सत्ता और विपक्ष एक सुर में
— कांग्रेस और भाजपा पार्षदों की साझा सहमति ने विरोध को किया कमजोर।
_ भाजपा पार्षदों में फूट उजागर
— विरोध करने वाले पार्षदों ने ही पार्टी के भीतर मिलीभगत के आरोप लगाए।
_हंगामा, घेराव और धरना भी बेअसर
— विरोध के बावजूद सभापति ने प्रस्ताव को बहुमत से पारित कराया। इस दौरान दो महिला और दो पुरुष पार्षदों ने हंगामा किया।
_स्टेडियम, विरासत और राजनीति
कैप्टन रूपसिंह स्टेडियम ग्वालियर की ऐतिहासिक पहचान है, जहां सचिन तेंदुलकर ने विश्व का पहला दोहरा शतक जड़कर इसे अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। ग्वालियर क्रिकेट एसोसिएशन की - महाआर्यमन सिंधिया के नेतृत्व में इस स्टेडियम को क्रिकेट गतिविधियों से जोड़कर रखने की मंशा रही है।
वहीं, नए शंकरपुर स्टेडियम के निर्माण के बाद लीज का विरोध करने वाले पार्षदों ने नगर निगम द्वारा संचालन की दलील दी, लेकिन सदन में यह तर्क बहुमत को प्रभावित नहीं कर सका।
_सियासी संदेश साफ
नगर निगम परिषद का यह फैसला बताता है कि सदन में संख्या और सहमति दोनों ही सिंधिया समर्थित सोच के साथ हैं, जबकि विरोध की राजनीति सीमित दायरे में सिमटकर रह गई।
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